दिल्ली में पुलिस और वकीलों की अदावत लंबे समय से चली आ रही है. दोनों के बीच विवाद कई बार सड़क से लेकर कोर्ट परिसर तक में देखने को मिला है. अब एक बार फिर शाहदरा थाने में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प ने इस पुरानी अदावत को चर्चा में ला दिया है. इस बीच दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया गया.

एसीपी पर आरोप है कि वह दो पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के विरोध में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के साथ शामिल हुए थे. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और पुलिस ने कब वकीलों को दौड़ादौड़ाकर पीटा था?
क्या है शाहदरा में शुरू हुआ विवाद?
सबसे पहले ताजा घटनाक्रम की बात करते हैं. ये मामला 23 अक्टूबर को शाहदरा के एक रिहायशी इलाके में दो गुटों के बीच मोटरसाइकिल को लेकर हुई बहस से शुरू हुआ था. इन दो गुटों में एक वकील और एक स्थानीय निवासी शामिल था. ये दोनों अपने समर्थकों के साथ शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे. वहां बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों गुटों के बीच हाथापाई और मारपीट शुरू हो गई. इस दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई.
मामले को लेकर वकीलों ने पुलिस पर कार्रवाई की मांग करते हुए दिल्ली की जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि थाने में उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की गई और ACP मनस्वी वशिष्ठ ने उन्हें धमकाया. साथ ही साथ अपनी रिवॉल्वर दिखाई. हालांकि, उन्होंने इस आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. जब मामला ज्यादा बढ़ा तो28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO अरुण कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया. इन दो अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद ही वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म की.
दो अधिकारियों की ट्रांसफर होने की वजह से पुलिसकर्मियों के एक वर्ग ने विरोध शुरू कर दिया. 2 नवंबर को सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर धरना दिया और दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर रद्द करने की मांग की. इस प्रदर्शन में ACP मनस्वी वशिष्ठ भी शामिल हुए. पुलिसकर्मियों की मांग थी की वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और थानों व कोर्ट परिसरों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नियम बनाए जाएं. इस प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड किया गया.
1988 में वकीलों को दौड़ादौड़ाकर पीटा गया
अब बात 1988 एक वाक्या की करते हैं, जिसमें वकीलों को दौड़ादौड़ाकर पीटा गया था. जनवरी 1988 में दिल्ली पुलिस ने राजेश अग्निहोत्री नाम के एक वकील को गिरफ्तार किया था. सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्रों ने उसे महिलाओं के कॉमन रूम से चोरी करने के आरोप में पकड़ा था. 16 जनवरी को जब उस वकील को हथकड़ी लगाकर तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया, तो वकीलों ने इसे गैरकानूनी बताते हुए विरोध शुरू कर दिया.
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने उसी दिन वकील को बरी कर दिया और पुलिस कमिश्नर को दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर वकील 18 जनवरी से हड़ताल पर चले गए. पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी ने 20 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया और कथित “चोर” को बरी करने के मजिस्ट्रेट के आदेश की आलोचना की. अगले दिन, जब वकीलों का एक ग्रुप तीस हजारी कोर्ट परिसर में ही स्थित किरण बेदी के कार्यालय में उनसे मिलकर अपनी चिंता जताना चाहता था, तो उन पर लाठीचार्ज का आदेश दे दिया गया, जिसमें 100 से ज्यादा वकील घायल हो गए. उन्हें दौड़ादौड़ाकर पीटा गया.
अगले दो महीनों तक वकीलों ने दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में अदालतों का कामकाज ठप कर दिया और किरण बेदी के इस्तीफे की मांग की. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की जांच के लिए जस्टिस डीपी वाधवा की अध्यक्षता में दो जजों की एक समिति बनाई, जिसके बाद हड़ताल खत्म हुई. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वकील को हथकड़ी लगाना गैरकानूनी था और सिफारिश की कि किरण बेदी का तबादला कर दिया जाए.
साल 2019 में वकीलों और पुलिस के बीच जमकर हुआ विवाद
वहीं, दिल्ली पुलिस और तीस हजारी कोर्ट के वकीलों के बीच विवाद साल 2019 में भी जमकर हुआ था. 2 नवंबर 2019 को पार्किंग को लेकर एक पुलिसकर्मी और वकील के बीच विवाद हुआ था. इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था. कोर्ट परिसर में पुलिस और वकील आमनेसामने आ गए थे. इस दौरान गोली चलने, पुलिस की ओर से लाठीचार्ज और वाहनों में आगजनी की घटनाएं हुईं. इस हिंसा में पुलिसकर्मियों और वकीलों समेत कई लोग घायल हुए थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था. साथ ही न्यायिक जांच के आदेश दिए थे.
पुलिस और वकीलों के बीच तनाव इसके बाद भी कम नहीं हुआ.साकेत और कड़कड़डूमा कोर्ट परिसरों में भी पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच टकराव हुआ. इसके बाद 5 नवंबर 2019 को दिल्ली पुलिस के हजारों जवान अपने ही मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए. थे. पुलिसकर्मियों ने वकीलों के हमले और अपने साथियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था.



