PM Modi Hydrogen Train Launch: भारत आज स्वच्छ और आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन ईंधन से यात्री ट्रेन चलाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, चीन और स्वीडन इस तकनीक का इस्तेमाल कर चुके हैं। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में तय करेगी। 10 कोच वाली इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा होगी और यह रास्ते में 14 स्टेशनों पर रुकेगी। यात्रियों के लिए किराया 5 से 25 रुपये के बीच रखा गया है।

₹112 करोड़ की लागत से तैयार हुई परियोजना

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें ट्रेन को हाइड्रोजन तकनीक के अनुरूप तैयार करने के साथ जींद में हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रीफ्यूलिंग की आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। ट्रेन का डिजाइन और इंटीग्रेशन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम के विकास में मेधा सर्वो ड्राइव्स और ग्रीनएच इलेक्ट्रोलिसिस जैसी कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई है।

दुनिया की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

 

 

जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग प्लांट

जींद रेलवे स्टेशन के पास देश का पहला हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांट बनाया गया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक से पानी से रोज करीब 430 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। स्टेशन पर लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकेगी, जबकि ट्रेन में एक बार में करीब 440 किलोग्राम ईंधन भरा जाएगा।

एक बार फ्यूल भरने पर 356 किलोमीटर का सफर

रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद लगभग 356 किलोमीटर तक चल सकती है। अनुमान है कि रोजाना दो फेरे लगाने के दौरान करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत होगी।

जींदसोनीपत रूट ही क्यों चुना गया?

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस रूट का चयन दो प्रमुख कारणों से किया गया। पहला, यहां ट्रेनों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम है, जिससे नई तकनीक का परीक्षण आसान होगा। दूसरा, दिल्ली के नजदीक होने के कारण निगरानी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना सुविधाजनक रहेगा। यह एक नॉनइलेक्ट्रिफाइड ब्रॉड गेज रूट भी है।

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे करती है काम?

हाइड्रोजन ट्रेन के भीतर फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाई जाती है। यही बिजली ट्रेन के मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुएं की जगह केवल पानी और जलवाष्प निकलते हैं, इसलिए इसे पर्यावरण के अनुकूल तकनीक माना जाता है।

हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ ऊर्जा की दिशा

 

 

ग्रीन हाइड्रोजन से चलेगी ट्रेन

यह ट्रेन ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली बनाकर पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, इसलिए इसे स्वच्छ ईंधन माना जाता है।

आगे 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना

रेल मंत्रालय की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत देश के विभिन्न हेरिटेज और पहाड़ी रूटों पर कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी है। जिन क्षेत्रों में रेलवे का विद्युतीकरण करना मुश्किल है, वहां यह तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है।

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पहले हरियाणा में ही चली थी देश की पहली CNG ट्रेन

हरियाणा ने इससे पहले भी रेलवे इतिहास में नई शुरुआत की थी। 13 जनवरी 2015 को रेवाड़ी और रोहतक के बीच देश की पहली CNG आधारित DEMU ट्रेन शुरू की गई थी। अब उसी राज्य से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी सफर शुरू करने जा रही है। 

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