Featured Image

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान को लेकर दिए गए अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं. सारा के केदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करने पर उन्होंने इसे शरीयत के खिलाफ बताते हुए मंदिर जाने को हराम बताया है. मौलाना ने कहा कि यह गुनाह है, जिसकी माफी सिर्फ अल्लाह से तौबा करके ही मिलेगी.

हालांकि, शाहाबुद्दीन रजवी का नाम सिर्फ इस बयान की वजह से ही सुर्खियों में नहीं आया है. वह लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं. मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वह एक राइटर भी हैं, जिन्होंने कई किताबें लिखी हैं.

कौन हैं मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी?

#WATCH | Bareilly, Uttar Pradesh: All India Muslim Jamaat National President Maulana Shahabuddin Razvi Barelvi says, “I have received information, and many young Muslims have also asked me regarding actress Sara Ali Khan visiting the Kedarnath Temple and offering prayers. Is this permissible in light of Sharia, and does Sharia allow for such actions? Regarding this, I would like to clarify the perspective of Islamic Sharia and what its ruling is on this matter. For any Muslim, whether a man or a woman, to participate in the faith of another religion, offering prayers and performing religious rituals, is considered impermissible (najayaz) under Sharia. Such actions are not permitted… Therefore, if Sara Ali Khan performed these acts—visiting the Kedarnath Temple, offering prayers, and seeking blessings—of her own free will and volition, then she has committed a sin—an act that is haram…” — ANI (@ANI) October 30, 2026

विज्ञापन

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का जन्म 4 अप्रैल 1974 को उत्तर प्रदेश के बहराइच में हुआ था. वह एक इस्लामी विद्वान, राइटर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनका कामकाज मुख्य रूप से बरेली से जुड़ा है. वह ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. यह देश के बड़े सुन्नी सूफी संगठनों में गिना जाता है. इसके अलावा वह इस्लामिक रिसर्च सेंटर के संस्थापक और ऑल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. वह पिछले करीब 10 साल से पसमांदा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी काम कर रहे हैं.

धार्मिक गुरु के करीबी रहे हैं शहाबुद्दीन रजवी

शहाबुद्दीन रजवी का नाम दिवंगत इस्लामी धर्मगुरु अख्तर रजा खान के करीबी लोगों में भी शामिल रहा है. जिन्हें अज़हरी मियां के नाम से जाना जाता था. उनके जीवन पर लिखी गई किताब के मुताबिक, रजवी ने करीब 30 साल तक उनके साथ काम किया. इस दौरान उन्होंने भारत और विदेशों में कई बड़े धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. बताया जाता है कि अज़हरी मियां उनके काम से काफी प्रभावित थे और उनकी तारीफ भी किया करते थे.

शहाबुद्दीन रजवी ने कौन-सी किताबें लिखी हैं?

शहाबुद्दीन रजवी सिर्फ धार्मिक मंचों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राइटिंग के क्षेत्र में भी उनकी पहचान है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने इस्लाम के इतिहास, धार्मिक विचारों और मान्यताओं पर हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में कई किताबें लिखी हैं. उनकी प्रमुख किताबों में ‘तारीख जमात रजा-ए-मुस्तफा’, ‘मुफ्ती-ए-आजम हिंद के खुलफा’, ‘हयाते ताजुश्शरिया’ और ‘करामाते ताजुश्शरिया’ शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने ‘तारीख-ए-इस्लाम’ नाम से छह खंडों में भी लेखन किया है.

मौलाना शहाबुद्दीन के वायरल बयान

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी धार्मिक मामलों के साथ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखते रहे हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी राजनीतिक दलों से समाज में नफरत फैलाने से बचने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की थी. इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर भी सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि समाजवादी पार्टी मुस्लिमों के वोट तो चाहती है, लेकिन मुस्लिम नेताओं और उनके मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं देती है. उन्होंने मुस्लिम समुदाय से दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही थी.

क्या है सारा अली खान से जुड़ा मामला?

दरअसल, 25 अक्टूबर यानी रविवार को सारा अली खान केदारनाथ मंदिर में दर्शन करने गई थीं. इस दौरान वह आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन के लिए कतार में खड़ी नजर आईं. पूजा करने के बाद मंदिर के बाहर उनकी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए, जिनमें वह हाथ जोड़कर प्रार्थना करती दिखाई दीं. इस पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लामिक शरिया के अनुसार किसी दूसरे धर्म के पूजा-पाठ में शामिल होना नाजायज नहीं है. उन्होंने सारा के इस काम को हराम बताया है. उनके मुताबिक, अगर सारा ने अपनी इच्छा से मंदिर में पूजा की है तो उन्हें तौबा करनी चाहिए, तभी एक्ट्रेस को उनके इस गुनाह की माफी मिलेगी.