कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साईवज्र’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने सचेंडी थाना क्षेत्र से 13 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो संगठित रूप से देशभर में लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के नागरिकों को अपना शिकार बनाया है और अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है।

पुलिस की विस्तृत जांच में इस गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है। आरोपी खुद को पुलिसकर्मी, क्राइम ब्रांच, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को अश्लील वीडियो प्रकरण में फंसाने की धमकी देते थे। वे मुकदमा दर्ज कराने और जेल भेजने का भय दिखाकर लोगों से बड़ी धनराशि ऐंठते थे। इसके अलावा, ये अपराधी प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और फर्जी पंजीकरण कराने का झांसा देकर भी आम जनता से ठगी करते थे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपराधियों के पास से 29 मोबाइल फोन, 3 कारें और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। साइबर सेल की जांच में 48 आईएमईआई और 68 मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इनकी पड़ताल करने पर 189 साइबर शिकायतें सामने आईं, जिनमें से 60 शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर सीधे तौर पर इस गिरोह से जुड़े पाए गए हैं। पूछताछ में यह भी पता चला कि ये अपराधी ठगी की रकम से राजस्थान के जैसलमेर में पार्टियां कर रहे थे।
पुलिस ने इस विशेष अभियान के तहत 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ सचेंडी क्षेत्र के गज्जापुरवा और नयापुरवा सहित कई गांवों में छापेमारी की थी। जांच में यह भी जानकारी मिली कि ये अपराधी खेतों, बागों और पानी की टंकियों पर बनी झोपड़ियों में छिपकर अलगअलग टोलियों में मोबाइल फोन के माध्यम से अपना नेटवर्क संचालित कर रहे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता , सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके बैंक खातों की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या सरकारी अधिकारी बनकर धन मांगने वालों के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें या अपने निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। यह गिरफ्तारी साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।



