यूपी में 2027 की चुनावी जंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. बीजेपी ने मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. अमित शाह आने वाले दिनों में ब्रज संभाग और बुंदेलखंड संभाग से चुनावी बिगुल फूकेंगे. गृहमंत्री इस बार सभी 6 रीजन का दौरा करेंगे और इस बार टिकट का सबसे बड़ा पैमाना होगा जीत की गारंटी!

लेकिन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं है. राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी का विवाद, 2022 में हारी हुई सीटें और 2024 लोकसभा चुनाव का झटका, ऐसे में शाह की रणनीति साफ है सीट भी बचानी है और हारी हुई सीटें वापस भी लानी हैं!
यूपी की 403 सीटों पर 2027 का रण और बीजेपी ने अभी से सीटों का चुनावी हिसाब शुरू कर दिया है. 2022 में बीजेपी ने 376 सीटों पर चुनाव लड़कर 255 सीटें जीती थीं यानी 121 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि बीजेपी गठबंधन ने कुल 273 सीटें जीती थीं.
49 सीटों पर जीतहार अंतर 5000 वोट से कम
अब इन्हीं हारी हुई सीटों का जीतहार के अंतर का हिसाब निकाला जा रहा है. 2022 में 49 सीटों पर जीतहार का अंतर 5 हजार वोट से कम था यानी पार्टी मान रही है कि कुछ सीटों पर हार और जीत के बीच का अंतर संगठन, बूथ और उम्मीदवार के प्रदर्शन से बदला जा सकता है. बीजेपी जीत को लेकर आश्वस्त है .
इतना ही नहीं अब बीजेपी ने सीटों को अलगअलग कैटेगरी में बांटकर रणनीति बनाने की तैयारी की है.
A कैटेगरी—वो सीटें जहां बीजेपी पिछले तीन चुनाव से जीत रही है.
B कैटेगरी—जहां पार्टी कम अंतर से जीती.
C कैटेगरी—जहां पार्टी दो बार से लगातार कम अंतर से हार रही है.
और सबसे कठिन सीटों के लिए अलग D कैटेगरी का फोकस. ये वो सीटें हैं, जो एसपीकांग्रेस के परंपरागत गढ़ है. यानी हर सीट के लिए अलग रणनीति, अलग संगठन और अलग चुनावी चेहरा.
61 सीटों पर बीजेपी का खास फोकस
बीजेपी के मिशन में खास फोकस उन 61 सीटों पर भी है. जहां पार्टी पिछले तीन विधानसभा चुनावों—2012, 2017 और 2022 में एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी. यहां बूथ फीडबैक, जातीय समीकरण, लाभार्थी संपर्क और संभावित उम्मीदवारों का सर्वे सब कुछ नए सिरे से होगा.
अमित शाह पिछले दो चुनाव में उत्तर प्रदेश जीत के चाणक्य रहे हैं. इससे बीजेपी नेताओं को तीसरी जीत की भी पूरी उम्मीद है. टिकट को लेकर भी बीजेपी में बड़ा मंथन शुरू है. सूत्रों के मुताबिक तीन या उससे ज्यादा चुनाव लड़ चुके नेताओं का पूरा चुनावी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है.
पिछली बार कितने वोट से हारे, जीतहार का अंतर कितना था अपने बूथ पर प्रदर्शन कैसा रहा? संगठन में पकड़ कितनी है? यानी अब सिर्फ पुराना चेहरा होना टिकट की गारंटी नहीं जीत की संभावना कमजोर हुई तो टिकट पर कैंची चल सकती है!
राम मंदिर चढ़ावा चोरी बीजेपी के लिए चुनौती
बीजेपी के सामने एक और चुनौती है अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावा विवाद. दान और चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच, गिरफ्तारियां और ट्रस्ट में बड़े संगठनात्मक बदलाव हुए हैं. ट्रस्ट ने CEO पद बनाने और शीर्ष स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है. राम मंदिर बीजेपी की सबसे बड़ी वैचारिक पहचान का केंद्र रहा है, इसलिए चढ़ावे का विवाद 2027 से पहले पार्टी के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती बन गया है.
उधर अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं. एसपी चीफ जल्द रथ यात्रा के जरिए जनता के बीच उतरने की तैयारी में हैं यानी एक तरफ अमित शाह 6 रीजन सीटवार रिपोर्ट और टिकट का जीत वाला फॉर्मूला तो दूसरी तरफ अखिलेश रथ यात्रा और PDA के साथ सीधा जनसंपर्क समाजवादी पार्टी चढ़ावा चोरी को भी योगी सरकार पर कलंक की तरह प्रचारित कर थोपने के मूड में है. वहीं कांग्रेस ने भी क्षेत्र में अपनी तैयारी तेज कर दी है.
यूपी में मिशन 2027 अब सिर्फ चुनावी नारा नहीं, सीटवार ऑपरेशन बन चुका है. बीजेपी के सामने चुनौती है. हारी हुई 121 सीटों का हिसाब, 61 मुश्किल सीटों का मिशन, 2022 के करीबी हार का मार्जिन और राम मंदिर चढ़ावे के विवाद का असर और इन सबके बीच अमित शाह का संदेश साफ है. 2027 में टिकट पुराने रिश्ते से नहीं, सिर्फ जीत की क्षमता से मिलेगा!


