नई कार खरीदने के लिए जब हम शोरूम पहुंचते हैं, तो टॉप मॉडल में मिलने वाले फीचर्स देखकर उसे खरीदने का मन करने लगता है. बड़ी स्क्रीन, सनरूफ और कई स्मार्ट फीचर्स कार को ज्यादा शानदार दिखाते हैं. कंपनियां भी इन फीचर्स को खूब बढ़ाचढ़ाकर पेश करती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे में कई बार हमें लगता है कि ज्यादा फीचर्स वाली कार ही सबसे अच्छी होगी. लेकिन जरूरी नहीं कि हर फीचर आपके रोजाना के इस्तेमाल में आए.

कई बार हम ऐसे फीचर्स के लिए भी हजारों रुपये ज्यादा खर्च कर देते हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ समय बाद लगभग बंद हो जाता है. भारतीय सड़कों, मौसम और ट्रैफिक को देखते हुए कुछ फीचर्स की उपयोगिता भी सीमित हो जाती है. आइए जानते हैं ऐसे 5 फीचर्स के बारे में, जिन्हें खरीदने से पहले उनकी जरूरत पर जरूर विचार करना चाहिए.

सनरूफ

आजकल भारतीय ग्राहकों के बीच वाली कारों का काफी क्रेज है. कई लोग तो कार खरीदते समय इस फीचर को अपनी पहली पसंद बना लेते हैं. हालांकि, भारत के ज्यादातर इलाकों में तेज गर्मी, धूल और प्रदूषण के कारण सनरूफ का इस्तेमाल करना आसान नहीं होता. इसे खोलने पर कार के अंदर की ठंडी हवा भी बाहर निकल सकती है.

कुछ लोग सनरूफ को सिर्फ कार का लुक बेहतर बनाने के लिए पसंद करते हैं. लेकिन अगर आप इसका इस्तेमाल बहुत कम करते हैं, तो इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है. खासकर शहर में रोजाना कार चलाने वालों को पहले यह सोचना चाहिए कि उन्हें वास्तव में इसकी कितनी जरूरत पड़ेगी. चलती कार में सनरूफ से बाहर निकलना बेहद खतरनाक है और ऐसा नहीं करना चाहिए.

कार का इनबिल्ट नेविगेशन सिस्टम

कई कारों के टॉप मॉडल में कंपनी की तरफ से दिया जाता है. इसका काम रास्ता बताना है, लेकिन कुछ कारों में इसका इस्तेमाल करना उतना आसान नहीं होता. कई बार मैप अपडेट करने की जरूरत पड़ती है और ट्रैफिक की ताजा जानकारी भी आसानी से नहीं मिलती.

वहीं, ज्यादातर लोग रास्ता खोजने के लिए पहले से ही अपने स्मार्टफोन पर Google Maps का इस्तेमाल करते हैं. इसमें ट्रैफिक और रास्ते में होने वाले बदलावों की जानकारी भी मिल जाती है. ऐसे में अगर आपकी कार में Android Auto या Apple CarPlay की सुविधा है, तो अलग से मिलने वाले नेविगेशन सिस्टम की जरूरत कम हो सकती है.

जेस्चर कंट्रोल

कुछ महंगी कारों में हाथ के इशारे से म्यूजिक बदलने और आवाज कमज्यादा करने की सुविधा मिलती है. पहली बार देखने में यह फीचर काफी आधुनिक लगता है, लेकिन रोजाना इस्तेमाल में यह हर किसी के लिए सुविधाजनक नहीं होता.

इसके मुकाबले स्टीयरिंग पर लगे बटन या नॉब से म्यूजिक कंट्रोल करना आसान हो सकता है. ड्राइविंग के दौरान हाथ हिलाकर कमांड देने से ध्यान भी भटक सकता है. इसलिए सिर्फ आकर्षक लगने के कारण इस फीचर को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने से पहले सोचें.

ऑटोमेटेड पार्किंग असिस्ट

इस फीचर की मदद से कार खुद पार्किंग की जगह पहचानकर गाड़ी को पार्क करने में मदद कर सकती है. लेकिन भारत में कई जगह पार्किंग की जगह कम होती है और गाड़ियों के बीच काफी कम दूरी बचती है. ऐसे हालात में यह सिस्टम हमेशा आपकी उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाता.

कई बार सिस्टम को जगह पहचानने और कार पार्क करने में ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए अगर आप तंग गलियों या भीड़भाड़ वाले बाजारों में अक्सर गाड़ी पार्क करते हैं, तो इस फीचर की उपयोगिता को समझना जरूरी है.

पैडल शिफ्टर्स

पैडल शिफ्टर्स स्टीयरिंग के पीछे लगे होते हैं, जिनकी मदद से ड्राइवर गियर बदल सकता है. ये फीचर खासकर उन लोगों को पसंद आ सकता है, जो खुद गियर बदलकर ड्राइविंग का मजा लेना चाहते हैं.