Bihar Space Technology: बिहार में अपराध नियंत्रण और सरकारी कामकाज की निगरानी के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की तैयारी है. राज्य सरकार भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग से जुड़ी संस्था INSPACe के साथ करार करने जा रही है. इस पहल के जरिए दियारा जैसे दुर्गम इलाकों में शराब तस्करी, अवैध गतिविधियों और फरार अपराधियों के संभावित ठिकानों की निगरानी करने की योजना है.

योजना का मकसद उन इलाकों तक प्रशासन की निगरानी पहुंचाना है, जहां नदियों, बालू के टापुओं, जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण पुलिस की कार्रवाई चुनौतीपूर्ण हो जाती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अंतरिक्ष से मिलने वाली तस्वीरों और आंकड़ों के जरिए संदिग्ध गतिविधियों वाले क्षेत्रों की पहचान कर पुलिस और मद्यनिषेध विभाग को कार्रवाई में मदद मिल सकती है.

दियारा में छिपेंगे कहां, अंतरिक्ष से होगी निगरानी

बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का निर्माण, भंडारण और तस्करी पुलिस तथा मद्यनिषेध विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है. गंगा समेत कई नदियों के दियारा क्षेत्रों में दूरदूर तक फैले बालू के टापू, दुर्गम रास्ते और नदी के बदलते बहाव के कारण पुलिस को कई बार छापेमारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

ऐसे इलाकों में अंतरिक्ष आधारित निगरानी तकनीक का इस्तेमाल होने पर संदिग्ध स्थानों की पहचान करने, जमीन पर हो रहे बदलावों का पता लगाने और कार्रवाई के लिए उपयुक्त जगह चिह्नित करने में मदद मिल सकती है. सेटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों का विश्लेषण कर पुलिस संभावित ठिकानों की जांच कर सकती है. इसके बाद स्थानीय टीमों को मौके पर भेजकर छापेमारी की जा सकती है.

फरार अपराधियों के सेफ जोन भी हो सकते हैं चिह्नित

प्रस्तावित तकनीक का दूसरा महत्वपूर्ण उपयोग फरार अपराधियों की तलाश में होगी. पुलिस के लिए यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण रहता है कि फरार आरोपी किन क्षेत्रों में छिपे हैं और कहां से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं. अंतरिक्ष से प्राप्त तस्वीरों, भौगोलिक आंकड़ों और पुलिस के पास उपलब्ध दूसरी खुफिया जानकारियों को मिलाकर संदिग्ध स्थानों का विश्लेषण किया जाएगा. इसके लिए अपराधियों का फोटो, फिंगरप्रिंट और सभी जानकारी डेटा में पहले से ही फीड रहेगी. इससे संभावित ठिकानों की पहचान और छापेमारी की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है.

इस तकनीक के संभावित इस्तेमाल में स्कूलकॉलेजों में कक्षाओं के संचालन और सरकारी कामकाज की निगरानी भी होगी. जानकारी के मुताबिक, सेटेलाइट को विशेष कोण पर रखकर किसी स्थान की गतिविधियों को देखने में मदद मिलेगी. यहां तक कि खुले में अखबार पढ़ रहे शिक्षक के हाथ में मौजूद अखबार और उसकी खबर की तस्वीर तक दिखाई देगी. इसके लिए अत्यधिक उच्च रिजॉल्यूशन वाली विशेष तकनीक की ब्यवस्था की गई है.

INSPACe के निदेशक और वैज्ञानिकों की टीम रहेगी मौजूद

INSPACe यानी इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्था है. इसका काम अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देना तथा अंतरिक्ष आधारित सेवाओं को सक्षम बनाना है. भारत में रिमोट सेंसिंग और पृथ्वीअवलोकन उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और भूमि के अध्ययन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.

प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक में अंतरिक्ष विभाग की ओर से INSPACe के निदेशक एयर वाइस मार्शल धनंजय खोत और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की टीम के शामिल होने की जानकारी दी गई है. INSPACe भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अधीन स्वायत्त संस्था है, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने का काम करती है.

बिहार में शराबबंदी को लागू कराने के लिए सरकार और पुलिस पहले भी अलगअलग तकनीकी उपाय अपना चुकी हैं. दियारा और जंगल जैसे दुर्गम इलाकों में छापेमारी के दौरान संचार व्यवस्था की समस्या दूर करने के लिए सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल करती थी. पहले भी पुलिस विभाग ने इसके लिए पांच सेटेलाइट फोन खरीदे थे.

अवैध शराब की भट्ठियों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों, ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद भी ली जा रही थी. बिहार में पूर्ण शराबबंदी 1 अप्रैल 2016 से लागू है. राज्य का मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग इसके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है. अब INSPACe के साथ प्रस्तावित करार इस दिशा में अगला कदम साबित होगा या नहीं, यह बैठक के फैसलों पर निर्भर करेगा.