Suzlon Energy में बड़े निवेशकों, FII और म्यूचुअल फंड का भरोसा बढ़ा है, जिन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। कंपनी को अपने नए S175 विंड टर्बाइन के लिए पहला बड़ा ऑर्डर भी मिला है, जो इसके कर्जमुक्त होने और मजबूत ऑर्डर बुक को दर्शाता है।

एक समय था जब Suzlon Energy का नाम शेयर बाजार में बड़ी गिरावट और भारी कर्ज की वजह से लिया जाता था। कई निवेशकों को लगता था कि कंपनी का भविष्य मुश्किल में है। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब विदेशी निवेशक यानी FII और म्यूचुअल फंड इस कंपनी में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। यही नहीं, Suzlon को अपने सबसे ताकतवर विंड टर्बाइन का पहला बड़ा ऑर्डर भी मिल गया है।

Suzlon के पास रिकॉर्ड ऑर्डर बुक है और अब उसके ऊपर कर्ज का बोझ भी नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर Suzlon में ऐसा क्या बदल गया कि बड़े निवेशकों का भरोसा फिर से लौट आया। आइए जानते हैं कंपनी के शेयरहोल्डिंग, नए ऑर्डर और कारोबार की पूरी कहानी।

FII ने क्यों बढ़ाया निवेश

Suzlon Energy में बड़े निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिख रहा है। जून 2026 तिमाही में विदेशी निवेशकों यानी FII और म्यूचुअल फंड दोनों ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। यह ऐसे समय हुआ है जब विदेशी निवेशकों ने इसी तिमाही में भारतीय शेयर बाजार से करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। इसके बावजूद Suzlon में निवेश बढ़ना कंपनी के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है।

जून 2026 तिमाही में FII की हिस्सेदारी 23.85 फीसदी से बढ़कर 24.15 फीसदी हो गई। हालांकि FII निवेशकों की संख्या 771 से घटकर 765 रह गई। इसका मतलब है कि कुछ निवेशक बाहर निकले, लेकिन बड़े विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। FIIs भारत के विंड एनर्जी सेक्टर के लंबे समय के विकास पर भरोसा जता रहे हैं। भारत ने साल 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का टारगेट रखा है। ऐसे में आने वाले सालो में विंड एनर्जी की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

म्यूचुअल फंड का भरोसा भी बढ़ा

म्यूचुअल फंड ने भी Suzlon में अपना निवेश बढ़ाया है। जून तिमाही में उनकी हिस्सेदारी 4.87 फीसदी से बढ़कर 6.47 फीसदी हो गई। वहीं म्यूचुअल फंड स्कीम की संख्या भी 30 से बढ़कर 33 हो गई। कुल संस्थागत निवेशकों यानी Institutional Investors की हिस्सेदारी भी 33.03 फीसदी से बढ़कर 35.27 फीसदी पहुंच गई।

प्रमोटर की हिस्सेदारी में हल्की कमी

कंपनी के प्रमोटरों की हिस्सेदारी 11.73 फीसदी से घटकर 11.71 फीसदी रह गई। हालांकि यह गिरावट बहुत मामूली है। अगर पूरे शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो सबसे ज्यादा 53 फीसदी हिस्सेदारी आम निवेशकों यानी पब्लिक के पास है। इसके बाद विदेशी निवेशकों की

विंड टर्बाइन का ऑर्डर

  • Suzlon को हाल ही में अपनी नई S175 विंड टर्बाइन का पहला बड़ा ऑर्डर मिला है।
  • Sunsure Energy ने कंपनी को 105 मेगावाट का ऑर्डर दिया है।
  • यह टर्बाइन भारत की सबसे ऊंची और सबसे ज्यादा क्षमता वाली विंड टर्बाइन बताई जा रही है।
  • खास बात यह है कि लॉन्च होने के सिर्फ दो हफ्ते के अंदर ही इसे पहला बड़ा ऑर्डर मिल गया।
  • पिछले 14 महीनों में Sunsure Energy ने Suzlon को तीसरी बार ऑर्डर दिया है।
  • दोनों कंपनियों के बीच अब तक कुल 400.8 मेगावाट के प्रोजेक्ट तय हो चुके हैं।

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कैसे बदली Suzlon की कहानी

Suzlon की शुरुआत साल 1995 में तुलसी तांती ने की थी। एक समय कंपनी दुनिया की बड़ी विंड एनर्जी कंपनियों में गिनी जाती थी। लेकिन तेजी से कारोबार बढ़ाने, ज्यादा कर्ज लेने और दुनिया में आई आर्थिक मंदी की वजह से कंपनी मुश्किल में आ गई। कई साल तक Suzlon का नाम कमजोर प्रदर्शन वाली कंपनियों में लिया जाता रहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने धीरेधीरे अपना कर्ज कम किया और भारत के बाजार पर ज्यादा ध्यान दिया।