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मुंबई से हावड़ा जा रही गीतांजलि एक्सप्रेस में एक कैंसर मरीज की मौत के बाद रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. यात्रियों का आरोप है कि 45 वर्षीय बिनोद पासवान की मौत की जानकारी शनिवार, 24 अक्टूबर को सुबह ही ट्रेन के कर्मचारियों को दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उनका शव करीब 12 घंटे तक कोच में पड़ा रहा. इस दौरान यात्रियों को शव के साथ सफर करना पड़ा. आखिरकार ट्रेन के टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर रात करीब 8:30 बजे शव को उतारा गया.

यात्रियों के मुताबिक, बिनोद पासवान गीतांजलि एक्सप्रेस के एम-2 कोच में यात्रा कर रहे थे. शनिवार सुबह सफर के दौरान उनकी मौत हो गई. यात्रियों का कहना है कि सुबह करीब 8 बजे ट्रेन के टिकट जांचने वाले टीटीई को घटना की जानकारी दे दी गई थी.मौत की पुष्टि के लिए मेडिकल जांच कराई जानी थी. हालांकि, यात्रियों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी शव को ट्रेन से उतारने और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया पूरी करने में कई घंटे लग गए.

शव के साथ सफर करने को मजबूर हुए लोग

यात्रियों के अनुसार, कोच में शव पड़े रहने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से जल्द मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने और शव को ट्रेन से बाहर निकालने की मांग की. उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला.

इस घटना ने ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों को परेशान कर दिया. यात्रियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में रेलवे की ओर से समय पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, ताकि मृतक के परिजनों और सहयात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. यात्रियों के मुताबिक, जब शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, तो शाम करीब 7 बजे एक यात्री ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाया. उसने अपनी पोस्ट में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग किया और रेल मदद शिकायत मंच पर भी शिकायत दर्ज कराई.

टाटानगर में उतारा गया शव

इसके बाद रात करीब 8:30 बजे गीतांजलि एक्सप्रेस झारखंड के टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंची. यात्रियों के अनुसार, यहां बिनोद पासवान के शव को ट्रेन से उतारा गया. फिलहाल, यात्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर रेलवे की आधिकारिक प्रतिक्रिया और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस घटना ने ट्रेन में किसी यात्री की मौत होने पर समय पर चिकित्सा सहायता, आवश्यक औपचारिकताओं और शव को सुरक्षित तरीके से उतारने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.