
नई दिल्ली: विश्लेषकों का कहना है कि अगले हफ्ते सोने और चांदी को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत फैसला यह तय कर सकता है कि सोने-चांदी की कीमतें स्थिर होंगी या उनमें और गिरावट आएगी।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुएं पहले ही दबाव में हैं। अब सबकी नजरें फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक और उसके चेयरमैन के बयानों पर टिकी हैं। इनसे यह संकेत मिल सकता है कि क्या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी।
ये केंद्रीय बैंक भी लेने वाले हैं फैसला
इसके साथ ही, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों पर भी नजर रहेगी। साथ ही, अमेरिका के ‘ड्यूरेबल गुड्स’ के ऑर्डर, कंज्यूमर कॉन्फिडेंस, पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई और तीसरी तिमाही के GDP आंकड़ों पर भी फोकस रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि यूरोजोन में महंगाई के आंकड़े, अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से जुड़े घटनाक्रम, रूस-यूक्रेन शांति वार्ता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भी बाजार की नजर में रहेंगे।
सोने पर बना रह सकता है दबाव
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट (VP) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। जब तक फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक सोने पर दबाव बना रह सकता है। आने वाला फैसला यह तय करेगा कि कीमतें मौजूदा स्तर के आसपास स्थिर होती हैं या उनमें और गिरावट आती है।’
घरेलू बाजारों में भी यह दबाव साफ दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव पिछले हफ्ते 5,768 रुपये (लगभग 4%) गिरकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए।
चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। यह 2 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसल गई। 15,087 रुपये (7.14%) की गिरावट के साथ 1.96 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई।
गिरावट का सिलसिला रहा जारी
त्रिवेदी ने कहा, ‘इस हफ्ते सोने में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। MCX पर सोने की कीमतों में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। यह 1,42,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।’
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं में सुधार की कोशिशें नाकाम रही हैं। इससे इन पर और बिकवाली का दबाव पड़ने का खतरा बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स पिछले सप्ताह 173.2 डॉलर या 4.14 फीसदी टूटकर 4,007.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। शुक्रवार को सोने की कीमत कुछ समय के लिए 3,989 डॉलर तक गिर गई थी। लेकिन, बाद में यह फिर से 4,000 डॉलर के स्तर के ऊपर आ गई।
सिल्वर फ्यूचर्स 3.35 डॉलर या लगभग 6 फीसदी लुढ़ककर 53.95 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च विभाग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा, ‘गोल्ड फ्यूचर्स में गिरावट का दौर जारी रहा। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई। सप्ताह के अंत में इसमें 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।’
उन्होंने कहा कि चांदी में आई गिरावट औद्योगिक धातुओं और सोने में कमजोरी को दिखाती है। इसके साथ ही ऊंची कीमतों के कारण उद्योगों की ओर से चांदी के विकल्पों की तलाश करने या इसके इस्तेमाल को कम करने से भी इसकी मांग में कमी आई है।
मेर ने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती लागत ने सोने-चांदी पर दबाव और बढ़ा दिया है।
ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि लगातार बनी रहने वाली महंगाई के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त रख सकते हैं या ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं।
फेड के रुख का ऐसे पड़ेगा इम्पैक्ट
त्रिवेदी ने कहा कि कीमतों में लगातार आ रही यह गिरावट यह भी दिखाती है कि निवेशक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के प्रति कितने संवेदनशील हो गए हैं।
इसलिए, आने वाले सप्ताह में फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की नीतिगत घोषणा और उसके चेयरमैन की कॉमेंट्री यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि सोना-चांदी की चाल किस दिशा में होगी।
त्रिवेदी ने आगे कहा, ‘अगर फेड का रुख सख्त (हॉकिश) रहता है – यानी ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम होती है या नीतियां और सख्त होने के संकेत मिलते हैं तो इससे डॉलर मजबूत हो सकता है। यील्ड बढ़ सकती है। उस स्थिति में सोने-चांदी पर और दबाव पड़ेगा। इसके उलट अगर उसका रुख थोड़ा नरम रहता है तो इससे ‘शॉर्ट कवरिंग’ हो सकती है और कीमतों को कुछ राहत मिल सकती है।’



