Modi Cabinet Decisions: केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी के नए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 मिशन को भी हरी झंडी दिखाई है। बुधवार, 15 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वाराणसी में 46 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई। इनमें एक फोरलेन और दूसरा सिक्सलेन एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। दोनों कॉरिडोर वरुणा नदी के किनारे विकसित किए जाएंगे। इस परियोजना का निर्माण कार्य अगले चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे

 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए वाराणसी में दो आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। जिसमें पहला प्रोजेक्ट वरुण एक्सप्रेसवे है, जो वरुण नदी के किनारे विकसित किया जाएगा। यह करीब 43 किलोमीटर लंबा छह और चार लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। इसके साथ ही इस परियोजना के लिए 10,998 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसे लगभग चार साल में पूरा करने का है।

गंगा नदी के किनारे बनेगा 46 किलोमीटर लंबा छहलेन कॉरिडोर

अब बात दूसरा प्रोजेक्ट की, जो गंगा नदी के किनारे बनने वाला 46 किलोमीटर लंबा छहलेन एलिवेटेड कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख हिस्सों को जोड़ते हुए IITBHU, लंका चौक और रामनगर तक जाएगा। इस दौरान गंगा पर एक आकर्षक सिग्नेचर ब्रिज भी बनाया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 14,448 करोड़ रुपये है।

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बैठक में कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 मिशन को भी मंजूरी दी गई, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और पूरे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है, ताकि देश वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में मजबूत पहचान बना सके।

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अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर चिप्स लगभग हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कैमरा, टीवी, फ्रिज, एसी, कार, ट्रेन से लेकर रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों तक, हर जगह सेमीकंडक्टर की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और सेमीकॉन 2.0 भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथसाथ वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 

भारत बनेगा मोबाइल ब्रांड की नई ताकत

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत अब तक 125 करोड़ मोबाइल फोन का निर्माण किया जा चुका है, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माण इकोसिस्टम बन गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने आज मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 62,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

वैष्णव ने कहा कि घरेलू स्तर पर पुर्जों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं, क्योंकि अब भारत में मोबाइल निर्माण का इकोसिस्टम काफी मजबूत हो चुका है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब हमें भारत के अपने मोबाइल फोन ब्रांड स्थापित करने होंगे। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत कुल उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, मोबाइल फोन का निर्यात दोगुना होकर 7.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के जरिए देश में लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

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