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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में फुटबॉल कोच के रूप में जिंदगी बिता रहे 69 वर्षीय विजय कुमार यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह करीब 40 साल से ज्यादा समय से धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस को चकमा दे रहा था. हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ का रहने वाला यादव पिछले कई सालों से नाहन में फुटबॉल खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहा था लेकिन खेल के मैदान में पहुंचे कुछ लोगों से हुई मुलाकात ने उसकी पहचान उजागर कर दी.

आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से रकम ली और फिर कार्यालय बंद करके फरार हो गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई थी, लेकिन यादव पुलिस की पकड़ में नहीं आया. आखिरकार पुलिस ने अब उसे नाहन में ढूंढ निकाला गया.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 5 मार्च 1984 को उदयपुर के धन मंडी पुलिस थाने में भंवर सिंह की शिकायत पर विजय कुमार यादव और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. आरोप था कि आरोपियों ने खुद को ‘किनारा ग्रुप/अग्रवाल सेल्स’ का अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया. शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने भारत सरकार से मंजूरी मिलने का दावा किया और नौकरी दिलाने के नाम पर भंवर सिंह से 3,000 रुपये लिए. इसी तरह कई अन्य लोगों से भी कथित तौर पर इतनी ही रकम वसूली गई. इस तरह कुल धोखाधड़ी की रकम करीब 32,000 रुपये बताई गई. पैसे लेने के बाद यादव और उसके साथियों ने अपना कार्यालय बंद कर दिया और वहां से फरार हो गए.

कितने आरोपी हुए थे गिरफ्तार?

इस मामले में हरियाणा, जयपुर और दिल्ली के रहने वाले 9 आरोपियों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि, यादव पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा. उस समय उसकी उम्र करीब 26 साल थी. बताया जाता है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने पैतृक गांव रूपगढ़ से जुड़े दस्तावेजों से अपना नाम हटवा दिया था. इसके बाद वह अलग-अलग राज्यों में रहा और धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान से दूरी बनाता चला गया.

कहां-कहां फुटबॉल कोच बनकर रहा?

कई स्थानों पर रहने के बाद यादव अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश के नाहन में बस गया. पिछले कुछ सालों से वह स्वतंत्र रूप से फुटबॉल कोचिंग दे रहा था और स्थानीय फुटबॉल क्लबों से भी जुड़ा हुआ था. इससे पहले वह असम, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर फुटबॉल का ट्रेनिंग दे चुका था. पुलिस के मुताबिक, नाहन में रहते हुए उसने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया और वहां घर भी बनाया. करीब 70 साल की उम्र में वह अपनी पत्नी के साथ रह रहा था. उसके परिवार में एक बेटा, एक बेटी और पोते-पोतियां हैं.

कैसे सामने आई असली पहचान?

शुक्रवार को नाहन के चौगान खेल मैदान में कुछ लोग यादव से मिले और फुटबॉल से जुड़ी मदद मांगी. बातचीत के दौरान उसकी पहचान की पुष्टि होने पर उन लोगों ने खुद को राजस्थान पुलिस का अधिकारी बताया. इसके बाद उसके पुराने मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर की गई जांच के जरिए यादव का पता लगाया. स्टेशन हाउस ऑफिसर सोलंकी के मुताबिक, जांच के दौरान रूपगढ़ में उसके परिवार के कुछ सदस्यों से संपर्क समेत कई पहलुओं पर काम किया गया. पुलिस ने शनिवार को विजय कुमार यादव को अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया.