उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महर्षि वाल्मीकि जयंती को लेकर योगी सरकार का बड़ा फैसला सियासी नजरिए से भी अहम माना जा रहा है. आज प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश के ऐलान के साथ सरकार सभी 75 जिलों में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मौके पर कानपुर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे.

दलित समाज पर फोकस
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक लंबे समय से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है. 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी की नजर भी इस बड़े सामाजिक वर्ग पर है. महर्षि वाल्मीकि जयंती के प्रदेशव्यापी आयोजनों को दलित समाज के बीच सामाजिकसांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है.
वाल्मीकि जयंती का खास महत्व
महर्षि वाल्मीकि को भारतीय परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है और वाल्मीकि समाज के बीच उनकी जयंती का खास महत्व है. ऐसे में प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयोजन और मुख्यमंत्री का खुद कार्यक्रम में शामिल होना सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है.
दलित मतदाताओं पर सबकी नजर
2027 के चुनाव में दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में लाना सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए अहम होगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बीजेपी जहां सामाजिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर सकती है, वहीं सपा अपने PDA समीकरण और बसपा अपने पारंपरिक दलित आधार के सहारे मैदान में है.
2027 चुनावों में कड़ा मुकाबला
2027 के चुनाव से पहले दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए सभी प्रमुख दलों के बीच रेस देखने को मिल रही है:
- भारतीय जनता पार्टी : सांस्कृतिक आयोजनों, वाल्मीकि सर्किट/बिठूर के विकास और सामाजिक समरसता के जरिए दलितों को व्यापक हिंदू पहचान और विकास एजेंडे के तहत एकजुट रखने की कोशिश.
- समाजवादी पार्टी : अपने PDA समीकरण के तहत दलित समुदाय को सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर संगठित करने में जुटी है.
- बहुजन समाज पार्टी : बसपा अपने पारंपरिक दलित कोर वोट बैंक को एकजुट रखने और उसे खिसकने से रोकने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर कैडर कैंप और संगठन विस्तार पर जोर दे रही है.
- कांग्रेस: कांग्रेस भी महापुरुषों की जयंतियों के बहाने जिलों में कार्यक्रमों के जरिए दलित और वंचित वर्गों से दोबारा संपर्क साधने का प्रयास कर रही है.



