धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रिश्वतखोरी से जुड़ा एक मामला सामने आया है। धर्मशाला स्थित नॉर्थ जोन विजिलेंस की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक युवक को कथित तौर पर 3,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आरोप है कि युवक ने एक व्यक्ति से जमाबंदी की नकल जारी करवाने के बदले पैसों की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।

इस कार्रवाई के बाद पटवारखाने में युवक की भूमिका और राजस्व दस्तावेज उपलब्ध करवाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे मांगने के मामले को लेकर जांच शुरू हो गई है। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पूरा घटनाक्रम क्या था और कहीं इस मामले में अन्य लोग भी शामिल तो नहीं हैं।
जमाबंदी की नकल के बदले मांगी थी रिश्वत
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता को जमाबंदी की नकल की जरूरत थी। इसी सिलसिले में उसका संपर्क पटवारखाने में साफ-सफाई सहित अन्य छोटे-मोटे कार्यों के लिए निजी तौर पर रखे गए युवक से हुआ। आरोप है कि युवक ने जमाबंदी की नकल जारी करवाने के बदले शिकायतकर्ता से 3,500 रुपये मांगे। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेज हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत मांगे जाने के बाद शिकायतकर्ता ने विजिलेंस से संपर्क किया। इसके बाद मामले की जानकारी धर्मशाला स्थित नॉर्थ जोन विजिलेंस थाना को दी गई।
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शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने बिछाया जाल
शिकायत के आधार पर विजिलेंस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए योजना तैयार की। इसके तहत शिकायतकर्ता के माध्यम से कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जैसे ही युवक ने कथित तौर पर 3,500 रुपये लिए, विजिलेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद युवक को गिरफ्तार कर लिया गया और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
पटवारखाने में निजी तौर पर काम करता था युवक
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार युवक को पटवारखाने में साफ-सफाई जैसे कार्यों के लिए निजी तौर पर रखा गया था। ऐसे में जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि जमाबंदी की नकल जारी करवाने के मामले में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी। विजिलेंस यह भी जांच सकती है कि क्या युवक ने अपने स्तर पर पैसे मांगे थे या इस कथित लेन-देन में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी।
सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई के समय संबंधित पटवारखाने के दो पटवारी फील्ड ड्यूटी पर थे। बताया गया है कि युवक को बुलाया गया था, लेकिन वह किसी काम का हवाला देकर पटवारखाने में ही रुका रहा। इसके बाद विजिलेंस ने कथित रिश्वत लेने के मामले में कार्रवाई की।
जांच के दायरे में कथित लेन-देन के दूसरे पहलू
युवक की गिरफ्तारी के बाद अब विजिलेंस टीम मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई, जमाबंदी की नकल से जुड़े काम में आरोपी की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। घटना की तारीख को लेकर उपलब्ध विवरण में शनिवार और मंगलवार, दोनों का उल्लेख है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना कार्रवाई की सटीक तारीख बताना उचित नहीं होगा।
राजस्व दस्तावेजों के काम में पारदर्शिता पर सवाल
जमाबंदी की नकल भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसकी जरूरत लोगों को जमीन संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए पड़ती है। ऐसे दस्तावेज के लिए रिश्वत मांगने का आरोप सामने आना राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को फिर रेखांकित करता है। फिलहाल विजिलेंस की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित रिश्वत मांगने और लेने की घटना से जुड़े सभी तथ्य क्या हैं और इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है या नहीं।



