प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ आम नागरिकों के योगदान को समझने और उसका जश्न मनाने का एक सफर है. इस दौरान उन्होंने पंजाब में पारंपरिक खेती, बुनाई के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्तराखंड में नदियों के संरक्षण जैसी पहलों का विशेष जिक्र किया.

12 साल पहले विजयादशमी के मौके पर शुरू हुए ‘मन की बात’ को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के लगातार चलता रहा है, और इस पूरे सफर में श्रोताओं ने एक अहम भूमिका निभाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मेरे लिए, ‘मन की बात’ हमारे देश के आम लोगों की कड़ी मेहनत, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवा भाव का जश्न मनाने का एक शानदार अवसर रहा है.”

Very inspiring efforts from across India highlighted in todays #MannKiBaat. Join in https://t.co/1QIa12bGCo

— Narendra Modi October 25, 2026

‘मेरे लिए मन की बात तीर्थयात्रा से कम नहीं’

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की सदियों पुरानी तीर्थयात्राओं की परंपरा की तुलना करते हुए कहा, “हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्राओं की परंपरा रही है. मेरे लिए, ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है, देश के लोगों के प्रयासों को करीब से समझने और उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने की यात्रा है.”

कार्यक्रम के दौरान, प्रधान मंत्री ने ‘नवत्रिन्जन’ पहल के माध्यम से पंजाब के मालवा क्षेत्र में पारंपरिक कृषि प्रथाओं के पुनरुद्धार पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा, “हमारे देश में कई पारंपरिक कौशल हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. खुशी की बात ये है कि ये परंपराएं अब नए प्रयोगों को प्रेरित कर रही हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन्हें वर्तमान समय की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जा रहा है. ऐसी ही एक पहल पंजाब में काफी समय से चल रही है.

‘खेती विरासत मिशन’ नामक एक संगठन ने जैविक खेती और पारंपरिक कृषि प्रथाओं को पुनर्जीवित करना शुरू किया. इसकी टीम के सदस्य पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देना चाहते थे. इस पहल का नाम ‘नवत्रिंजन’ रखा गया. इस पहल के तहत जैविक खेती की जाती है. कपास को बिना रसायनों के उपयोग के उगाया जाता है और यह प्राकृतिक रूप से रंगीन भी होता है.

‘वाल्मीकि ने दी बड़ी सीख’

पीएम मोदी ने कहा महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है. एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं. वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है. भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया. निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया. सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं.