अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विश्वस्त सहयोगी, सीनेटर लिंडसे ग्राहम का बीते 11 जुलाई को 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. ग्राहम का प्रभाव ट्रम्प सरकार में इतना था कि वे कई महत्वपूर्ण फैसलों में हिस्सेदार रहा करते थे. मतलब यह हुआ कि ट्रम्प ने अपना भरोसेमंद सहयोगी खो दिया. अमेरिकी सीनेट में किसी सीनेटर की मृत्यु हो जाए, इस्तीफा आ जाए या उसे पद से हटा दिया जाए, तो सीट खाली हो जाती है. इसे सीनेट वैकेंसी कहा जाता है. आइए, ग्राहम के निधन के बहाने समझते हैं कि सीनेट वैकेंसी कैसे भरी जाती है? भारत से कितनी अलग है अमेरिका की प्रक्रिया?

अमेरिका में सीनेट वैकेंसी भरे जाने की प्रक्रिया पूरे देश में एक जैसी नहीं है. यह तीन चीजों से तय होता है. अमेरिकी संविधान, 17वां संविधान संशोधन और संबंधित राज्य का चुनाव कानून. किसी राज्य में राज्यपाल तुरंत किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है तो किसी दूसरे राज्य में सीधे उपचुनाव कराना जरूरी हो सकता है.

कैसी है अमेरिकी सीनेट की मूल संरचना?

अमेरिका में 50 राज्य हैं. हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं. इस तरह सीनेट में कुल सौ सदस्य होते हैं. हर सीनेटर का कार्यकाल छह वर्ष का होता है. सीनेट कभी भंग नहीं होती. इसके करीब एकतिहाई सदस्यों का चुनाव हर दो साल में होता है. यह व्यवस्था भारत में राज्यसभा की तरह है. पर, भारत और अमेरिका में एक महत्वपूर्ण अंतर है. सीनेटर का चुनाव सीधे जनता करती है. यह व्यवस्था 1913 में लागू हुए 17वें संविधान संशोधन के बाद शुरू हुई. जबकि, भारत में राज्य सभा सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती.

सीनेटर लिंडसे ग्राहम का बीते 11 जुलाई को 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

17वां संविधान संशोधन क्या कहता है?

अमेरिका में हुए 17वें संशोधन के अनुसार, जब किसी राज्य की सीनेट सीट खाली हो, तो राज्य का कार्यकारी प्रमुख चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा. अमेरिका में राज्य का कार्यकारी प्रमुख सामान्य रूप से राज्यपाल होता है. संशोधन राज्य की विधानसभा को यह अधिकार भी देता है कि वह राज्यपाल को अस्थायी नियुक्ति का अधिकार दे सके. इसका अर्थ यह है कि संविधान राज्यपाल को हर स्थिति में स्थायी नियुक्ति का अधिकार नहीं देता.

सीनेटर की मृत्यु के बाद राज्यपाल किसी योग्य व्यक्ति को चुन सकता है. यह व्यक्ति तुरंत पद संभाल सकता है. नियुक्त व्यक्ति आमतौर पर दो स्थितियों में से किसी एक में पद पर रहता है. जब तक विशेष चुनाव नहीं हो जाता या जब तक अगला नियमित चुनाव नहीं हो जाता. नियुक्त व्यक्ति पूरा छह वर्ष का नया कार्यकाल शुरू नहीं करता. वह केवल पुराने सीनेटर के बचे हुए कार्यकाल को पूरा करता है.

क्या नियुक्त व्यक्ति उसी पार्टी का होना चाहिए?

यह नियम पूरे अमेरिका में समान नहीं है. कुछ राज्यों में राज्यपाल को उसी राजनीतिक दल का व्यक्ति चुनना पड़ता है, जिस दल से मृत सीनेटर संबंधित था. कुछ में राजनीतिक दल राज्यपाल को तीन नामों की सूची देता है. राज्यपाल उसी सूची में से किसी एक व्यक्ति को चुनता है. कुछ राज्यों में राज्यपाल को ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती. वह अपनी पसंद का योग्य व्यक्ति नियुक्त कर सकता है. इस व्यवस्था से राजनीतिक विवाद भी पैदा होते रहे हैं. यदि राज्यपाल अलग दल से है, तो वह खाली सीट पर अपने दल का व्यक्ति नियुक्त कर सकता है. इससे सीनेट में दलों की शक्ति का संतुलन बदल सकता है.

भारत में राज्यसभा को अमेरिकी सीनेट के करीब माना जाता है.

कई राज्यों में तुरंत विशेष चुनाव की है व्यवस्था

कुछ राज्यों में राज्यपाल को सीनेटर नियुक्त करने का अधिकार नहीं है. ऐसे राज्यों में सीट खाली होते ही विशेष चुनाव कराया जाता है. जनता सीधे मतदान करती है. चुनाव जीतने वाला व्यक्ति कार्यकाल की बची हुई अवधि पूरी करता है. विशेष चुनाव की तारीख राज्य का कानून तय करता है. कुछ राज्यों में चुनाव कुछ महीनों के भीतर होता है. कुछ राज्यों में इसे अगले नियमित चुनाव के साथ कराया जाता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि अस्थायी नियुक्ति के बजाय जनता जल्द अपना प्रतिनिधि चुन सके.

चुनाव कब कराया जाता है?

अमेरिका में चुनाव की कोई एक राष्ट्रीय समय सीमा नहीं है. राज्य का कानून यह तय करता है कि चुनाव कितने समय में होगा. कुछ राज्यों में उपचुनाव शीघ्र कराया जाता है. कुछ राज्यों में नियुक्त सीनेटर अगले नियमित चुनाव तक पद पर रहता है. समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि सीट कब खाली हुई. यदि मृत्यु चुनाव के बहुत करीब हुई है, तो चुनाव उसी नियमित चुनाव में हो सकता है. यदि कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बचा है, तो अलग से विशेष चुनाव कराया जा सकता है.

सीनेट में नियुक्त व्यक्ति कब काम शुरू करता है?

राज्यपाल की नियुक्ति के बाद व्यक्ति को सीनेट में अपने प्रमाणपत्र जमा करने होते हैं. सीनेट उन प्रमाणपत्रों की जांच करती है. इसके बाद शपथ दिलाई जाती है. शपथ के बाद नियुक्त व्यक्ति आधिकारिक रूप से सीनेटर के रूप में काम शुरू करता है. वह कानून बनाने, समितियों में भाग लेने और मतदान करने का अधिकार प्राप्त करता है. कभीकभी कोई उम्मीदवार चुनाव जीत चुका होता है, लेकिन शपथ लेने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है. ऐसी स्थिति में भी राज्य के कानून की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. कुछ राज्यों में राज्यपाल निर्वाचित व्यक्ति को औपचारिक रूप से नियुक्त कर सकता है. कुछ मामलों में पार्टी को नया उम्मीदवार चुनना पड़ सकता है.

राज्यसभा. फाइल फोटो.

भारत में राज्यसभा की खाली सीट कैसे भरी जाती है?

भारत में राज्यसभा को अमेरिकी सीनेट के करीब माना जाता है. दोनों उच्च सदन हैं, लेकिन दोनों की चुनाव प्रक्रिया अलग है. भारत में राज्यसभा के सदस्य जनता द्वारा सीधे नहीं चुने जाते. उनका चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं. यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है. राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है. हर दो वर्ष में करीब एकतिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं.

राज्यसभा सदस्य की मृत्यु के बाद भारत में क्या होता है?

यदि किसी राज्यसभा सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो सीट खाली हो जाती है. इस सीट को भरने के लिए भारत निर्वाचन आयोग उपचुनाव कराता है. संबंधित राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं. उम्मीदवार को जीतने के लिए आवश्यक मतों की संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या और खाली सीटों के आधार पर तय होती है. जीतने वाला व्यक्ति पुराने सदस्य के बचे हुए कार्यकाल को पूरा करता है. उसे नया छह वर्ष का कार्यकाल नहीं मिलता.

भारत में राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं होती

अमेरिका के कई राज्यों में राज्यपाल अस्थायी सीनेटर नियुक्त कर सकता है. भारत में राज्यपाल राज्यसभा की खाली सीट पर किसी व्यक्ति को नियुक्त नहीं कर सकता. भारत में खाली सीट भरने का सामान्य रास्ता उपचुनाव है. राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग संचालित करता है. इसमें नामांकन, जांच, मतदान और मतगणना शामिल होती है. जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, सामान्य रूप से खाली सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराने का प्रयास किया जाता है. यदि सदस्य का कार्यकाल एक वर्ष से कम बचा हो, तो उपचुनाव न कराने का निर्णय लिया जा सकता है.

भारत में 12 सदस्य नियुक्त कर सकते हैं राष्ट्रपति

राज्यसभा में 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. वे साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान रखते हैं. यदि मनोनीत सदस्य की मृत्यु हो जाती है या वह इस्तीफा देता है, तो उस सीट पर चुनाव नहीं होता. राष्ट्रपति किसी योग्य व्यक्ति को मनोनीत कर सकता है. यह अमेरिकी व्यवस्था से अलग है. अमेरिकी सीनेट में सभी सीटें राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी हैं. वहां राष्ट्रपति सीनेटर नियुक्त नहीं कर सकता.