राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक को लेकर बड़ा बदलाव किया है. अब यह बैठक हर साल के बजाय हर तीन साल में आयोजित की जाएगी. पहले बैठक का स्थान तय नहीं था, लेकिन अब इसे भी निर्धारित कर दिया गया है. आने वाले समय में यह बैठक नागपुर में आयोजित की जाएगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संघ ने बैठक में बदलाव क्यों किया है, इसको लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है. हालांकि, यह जरूर कहा गया है कि अब हर साल अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के जगह क्षेत्रीय प्रतिनिधि सभा आयोजित होगी.

इस फैसले को की कार्यशैली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. आरएसएस की स्थापना के समय से ही हर साल मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक होती रही है.
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा क्या है?
आरएसएस के भीतर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है. यहीं पर संघ से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं. संघ के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी का चुनाव भी इसी की बैठक में होता है.
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ साल भर का एजेंडा पेश करता है. इस पर चर्चा और विचारविमर्श किया जाता है. इसके अलावा, उस साल की प्रमुख घटनाओं पर भी बैठक में चर्चा होती है.
प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ के सरसंघचालक और सरकार्यवाह जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होते हैं. आरएसएस से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइज़र के मुताबिक, इस बैठक में करीब 1,500 प्रतिनिधि शामिल होते हैं.
ABPS बैठक में कौनकौन शामिल होते हैं?
संघ के संविधान के अनुच्छेद 15 में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसके मुताबिक प्रतिनिधि सभा की बैठक में निम्न सदस्य शामिल होंगे
1. प्रतिनिधिमंडलों के प्रतिनिधि.
2. संभागों, प्रांतों और प्रांतीय केंद्रों के संघचालक और प्रचारक.
3. केंद्रीय कार्यकारी मंडल के सदस्य.
इसके अलावा हर प्रांत की प्रतिनिधि सभा के चुने हुए सदस्य, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भेजने के लिए अपने प्रांत से कुल सदस्यों के आठवें हिस्से के बराबर प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे.
RSS के लिए इसकी बैठक क्यों जरूरी है?
1. सभी बड़े मसलों पर फैसला लेने का अधिकार अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को है. संघ में सरसंघचालक का पद भले बड़ा है, लेकिन कार्यकारी शक्ति सरकार्यवाह के पास है. इसका चुनाव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के जरिए होता है. हर 3 साल पर इसका चुनाव कराना अनिवार्य है.
यही वजह है कि संघ ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक को पूरी तरह खत्म नहीं किया है. अब हर 3 साल पर इसकी बैठक बुलाई जाएगी.
2. किसी भी बड़े मुद्दे पर संघ इसी बैठक में फैसला लेता है. मसलन, राम मंदिर विवाद हो या समलैंगिक विवाह का मामला, संघ ने इन मुद्दों पर इसी बैठक में अपने विचार रखे हैं. संघ बड़े मुद्दों पर इसी बैठक में प्रस्ताव भी पारित करता है, जिन्हें उसके स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाते हैं.
संघ के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होते हैं और बड़े मुद्दों पर चर्चा कर फैसले लेते हैं. इसलिए इसे संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था भी कहा जाता है.
3. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद ही संघ अपने विस्तार से जुड़े आंकड़े जारी करता है. इस बैठक में संघ बताता है कि उसकी शाखाओं की संख्या में कितनी बढ़ोतरी हुई है और भविष्य के लिए उसके लक्ष्य क्या हैं.



