सऊदी में 2 बांग्लादेशियों के फांसी के मामले में तारिक रहमान की सरकार एक्शन की तैयारी में है. मामले में किरकिरी होने के बाद बांग्लादेश मिशन के करीब 100 अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है. यह खबर बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया टाइम्स ऑफ बांग्लादेश ने दी है. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार उन अधिकारियों को चिह्नित कर रही है, जो इसके लिए जिम्मेदार थे.

अखबार ने विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि रियाद में मिशन के अधिकारियों को दोनों के जेल में होने की खबर थी, लेकिन उन लोगों ने इसको लेकर कोई पहल नहीं की. अगर बांग्लादेश मिशन इसको लेकर कोई पहल करता तो दोनों की जान बच सकती थी.

सितंबर में मिल गई थी दोनों की जानकारी

मानवजीवन अखबार के मुताबिक दूतावास को सितंबर में ही सऊदी अरब ने दोनों की जानकारी दे दी थी. जानकारी में दोनों के नाम और अपराध के बारे में बताया गया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की. यह भी जानने की कोशिश नहीं कि दोनों किस हालात में हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश मिशन के तहत सऊदी में 100 अधिकारी तैनात हैं. मजदूरों के लिए एक अलग से लेबर विंग बनाया गया है. बांग्लादेश के करीब 5 लाख मजदूर सऊदी में काम करते हैं.

दोनों बांग्लादेशियों को मौत की सजा क्यों?

सऊदी सरकार के मुताबिक बांग्लादेशी मूल के नजरुल इस्लाम और स्विटी अख्तर को सजा ए मौत दी गई है. दोनों पर अनैतिक हरकत का आरोप था. दूसरी तरफ बांग्लादेश सरकार का कहना है कि सितंबर में जो रिपोर्ट्स दी गई है, उसमें व्यभिचार का कोई जिक्र नहीं था. उसमें नजरुल पर साइबर फ्रॉड का आरोप था.

हालांकि, स्विटी पर व्यभिचार के आरोप का जिक्र था. सऊदी में व्याभिचार को साबित करने के लिए 4 ऐसे सबूतों की जरूरत होती है, जो ठोस हो. वहीं स्विटी के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की गिरफ्तारी अवैध तरीके से कार खरीदने के आरोप में की गई थी.

बांग्लादेश की सरकार ने सऊदी अरब से पूरे मामले की डिटेल रिपोर्ट मांगी है. सरकार का मानना है कि मिशन की लापरवाही के कारण यह घटना घटी है. ऐसे में डिटेल रिपोर्ट्स आने के बाद मिशन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.