दिल्ली की हवा फिर जहरीली हो रही है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, गुरुवार सुबह दिल्ली की एयर क्वालिटी कई खास जगहों पर ‘खराब’ कैटेगरी में रही. ITO पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 280 और AIIMS के पास 276 तक पहुंच गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं, अक्षरधाम मंदिर और आनंद विहार के आसपास रीडिंग 237 रही, जबकि इंडिया गेट के पास AQI 238 रिकॉर्ड किया गया. प्रदूषित होती हवा को देखते हुए दिल्लीएनसीआर में बुधवार को ग्रैप1 लागू किया गया था.

हवा कितनी जहरीली है यह एयर क्वालिटी इंडेक्स को देखकर बताया जाता है. एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI ऐसा पैमाना है, जिससे पता चलता है कि किसी जगह की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है और वो लोगों की सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक हो सकती है. आसान भाषा में समझें तो जैसे शरीर का तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल होता है, वैसे ही हवा के प्रदूषण का स्तर जांचने के लिए AQI देखते हैं. अब सवाल है कि AQI कैसे कैल्कुलेट करके तैयार किया जाता है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स में क्याक्या होता है?

आसान भाषा में कहें तो जैसे शरीर का तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल होता है, वैसे ही हवा में प्रदूषण के स्तर को समझने के लिए AQI देखा जाता है. AQI को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2014 में तैयार किया, ताकि आम लोग हवा की स्थिति आसानी से समझ सकें. इसे आईआईटी कानपुर और पर्यावरनण विशेषज्ञ की सलाह पर बनाया गया था. भारत में AQI को 0 से 500 के पैमाने पर छह श्रेणियों में बांटा गया है.

इंडिया गेट. फोटो: PTI

AQI को तैयार करने के हवा में प्रदूषण फैलाने वाले कई तरह के प्रदूषकों की मात्रा को जांचा जाता है. जैसे

  • PM2.5: बेहद छोटे कण, जो फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं.
  • PM10: धूल, मिट्टी और दूसरे बड़े प्रदूषण कण.
  • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड : वाहनों और उद्योगों से निकलने वाली गैस.
  • सल्फर डाइऑक्साइड : मुख्य रूप से ईंधन जलाने से निकलने वाली गैस.
  • ओजोन : जमीन के नजदीक बनने वाली हानिकारक गैस.
  • कार्बन मोनोऑक्साइड : ईंधन के जलने से बनने वाली गैस.

इन प्रदूषकों के माप के आधार पर AQI निकाला जाता है.

Rigorous monitoring across 283 construction sites with 608 antismog systems & CCTV/AQI tracking for 500+ buildings, managed via ICCC! Led by Environment Minister Sardar @mssirsa for a cleaner Delhi.
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— Delhi Pollution Control Committee October 22, 2026

कैसे तैयार होता है एयर क्वालिटी इंडेक्स?

CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, AQI को तैयार करने आठ प्रदूषक गिने जाते हैं. PM10, PM2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड , सल्फर डाइऑक्साइड , कार्बन मोनोऑक्साइड , ओजोन , अमोनिया और लेड . लेड की रीयलटाइम माप संभव नहीं है, इसलिए वह बीते दिनों की गणना में काम आता है.

गणना तीन चरणों में होती है

औसत सांद्रता: PM, NO2, SO2, NH3 और Pb का 24 घंटे का औसत लिया जाता है, जबकि CO और ओजोन का 8 घंटे का रनिंग औसत.

सबइंडेक्स: हर प्रदूषक की सांद्रता को उसके तय “ब्रेकपॉइंट” के आधार पर एक सूत्र से 0500 के पैमाने की संख्या में बदला जाता है. इसे सबइंडेक्स कहते हैं.

सबसे खराब AQI: सभी सबइंडेक्स में सबसे ज्यादा वाला मान ही उस जगह का AQI माना जाता है. CPCB के मुताबिक यह तरीका इसलिए चुना गया क्योंकि कई प्रदूषकों के मिलेजुले असर की जानकारी अभी पूरी नहीं है.

सूत्र: सबइंडेक्स = × + ILO। यहां Cp प्रदूषक की मापी गई सांद्रता है, BHI और BLO उसके ऊपरनीचे के ब्रेकपॉइंट हैं, और IHI व ILO उन ब्रेकपॉइंट से जुड़े AQI मान.

इस सूत्र के आधार पर सामने आने वाली संख्या बताती है कि हवा प्रदूषित है या औसत या सामान्य.

AQI की छह श्रेणियां

दिल्ली का AQI शहर के 40 मॉनिटरिंग स्टेशनों की औसत रीडिंग से निकाला जाता है. इसलिए किसी इलाके में AQI इससे ज्यादा या कम हो सकता है. इसे मापने के लिए 6 श्रेणियां बनाई गई हैं.

  • अच्छा : न्यूनतम असर
  • संतोषजनक : संवेदनशील लोगों को हल्की सांस की तकलीफ
  • मध्यम : फेफड़ों और हृदय के मरीजों, बच्चों व बुजुर्गों को परेशानी
  • खराब : लंबे समय तक रहने पर सांस लेने में तकलीफ, हृदय रोगियों को दिक्कत
  • बहुत खराब : लंबे संपर्क से सांस की बीमारी का खतरा
  • गंभीर : स्वस्थ लोगों पर भी असर, हल्की गतिविधि में भी दिक्कत

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