पारिजात या हरसिंगार का पौधा अपने धार्मिक महत्व के अलावा बेहतरीन सुगंध के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पारिजात के पौधे को स्वर्ग से धरती पर लाया गया था। हम में से अधिकतर लोगों को इस बारे में जानकारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरिवंश पुराण में पारिजात के पौधे पर मनोकामना पूरी करने वाला पौधा बताया गया है। पारिजात का फूल सूर्य की रोशनी की बजाय चंद्रमा की रोशनी में खिलते हैं और सुबह तक झड़ जाते हैं।

जानिए पारिजात के फूल अर्पित करने के नियम

महादेव को पारिजात का फूल प्रिय है। भक्तों का मानना है कि भगवान शिव को पारिजात का फूल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पूजा भी फलित होती है।

हालांकि शिवलिंग पर पारिजात के फूल को चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि कभी भी पारिजात का फूल तोड़कर पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से महादेवी की पूजा निष्फल हो सकती है।

यह इकलौता ऐसा पुष्प है, जिसको सीधा जमीन से उठाकर महादेव पर चढ़ाया जाता है। इस फूल को धोने की जरूरत भी नहीं होती है, क्योंकि यह शास्त्रों में बेहद पवित्र माना जाता है। इस विधि से पारिजात का फूल महादेव पर अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

जानें पारिजात पौधे का वास्तु महत्व

अक्सर पारिजात पौधे को सिर्फ सजावटी पौधा माना जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जबकि यह भारतीय पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक प्रथाओं में बेहद गहराई से समाई हुई है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से पारिजात का पौधा उत्पन्न हुआ था।

पारिजात को दिव्य फूल माना जाता है। बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपनी सबसे प्रिय पत्नी रुक्मिणी के लिए यह फूल पृथ्वी से लेकर आए थे। हिंदू मंदिरों, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान में पारिजात फूल देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। जोकि आध्यात्मिक भक्ति, प्रेम और शुद्धता का प्रतीक होता है।

औषधीय गुणों से भी भरपूर है ये पौधा

आध्यात्मिक नजरिए के अलावा पारिजात का पौधा औषधीय रूप से भी बेहद खास होता है। इस पौधे के तने, फूल, पत्तियां, छाल और बीज सभी चीजें सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। वहीं पारिजात के पौधे से सुगंधित इत्र भी बनाए जाते हैं।