SIP और म्यूचुअल फंड को हमेशा निवेश का सबसे सुरक्षित और डायवर्सिफाइड तरीका बताया जाता है. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि अलगअलग सेक्टर और अलगअलग फंड में पैसा लगाकर जोखिम कम किया जा सकता है. लेकिन जून 2026 तक के आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं. देश के सबसे बड़े शेयर बाजार इंडेक्स निफ्टी 50 में सिर्फ पांच कंपनियों का वेटेज 41% तक पहुंच चुका है. यानी अगर कोई निवेशक निफ्टी 50 इंडेक्स फंड या ETF में पैसा लगा रहा है, तो उसके हर 100 रुपये में करीब 41 रुपये सिर्फ HDFC Bank, Reliance Industries, ICICI Bank, Bharti Airtel और Infosys जैसे पांच शेयरों में ही निवेश हो रहे हैं. यही ट्रेंड सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं है. विदेशी निवेशकों , बड़े म्यूचुअल फंड, LIC, EPFO और F&O बाजार तक में बड़ी हिस्सेदारी कुछ चुनिंदा कंपनियों में केंद्रित है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या करोड़ों निवेशकों को वास्तव में डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो मिल रहा है या फिर अलगअलग नामों से निवेश होने के बावजूद पैसा आखिरकार उन्हीं कुछ शेयरों में पहुंच रहा है? अगर इन शेयरों में बड़ी गिरावट आती है तो उसका असर लगभग हर निवेशक पर एक साथ पड़ सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि मौजूदा निवेश व्यवस्था में कंसंट्रेशन का जोखिम कितना बड़ा है और इससे बचने के लिए निवेशक क्या कर सकते हैं.

भारत में SIP निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और करोड़ों लोग हर महीने म्यूचुअल फंड के जरिए शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं. करीब 11 करोड़ एक्टिव SIP खाते हैं. ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि अलगअलग फंड खरीदने से उनका पैसा कई कंपनियों में बंट जाता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश बड़े फंडों की टॉप होल्डिंग लगभग एक जैसी है. HDFC Bank, Reliance Industries, ICICI Bank, Bharti Airtel और Infosys जैसी कंपनियां लगभग हर बड़े लार्ज कैप फंड और निफ्टी 50 इंडेक्स में शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि निवेशक चाहे इंडेक्स फंड खरीदे, लार्ज कैप फंड खरीदे या EPFO के जरिए निवेश करे, उसका बड़ा हिस्सा आखिरकार उन्हीं चुनिंदा शेयरों में पहुंच रहा है. यही वजह है कि बाजार में किसी एक बड़े शेयर में तेज गिरावट आने पर उसका असर एक साथ लाखों निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दिखाई देता है.

1. निफ्टी 50 में क्यों बढ़ गया है कंसंट्रेशन?

जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी 50 इंडेक्स में सिर्फ पांच कंपनियों का दबदबा है. HDFC Bank का वेटेज 14%, Reliance Industries का 9%, ICICI Bank का 8%, Bharti Airtel का 5% और Infosys का 5% है. यानी ये पांच कंपनियां मिलकर पूरे इंडेक्स का 41% हिस्सा संभालती हैं. अगर कोई निवेशक NIFTY 50 ETF या इंडेक्स फंड में 1 लाख रुपये लगाता है, तो करीब 41 हजार रुपये सिर्फ इन्हीं पांच कंपनियों में निवेश हो जाते हैं, जबकि बाकी 45 कंपनियों में सिर्फ 59 हजार रुपये जाते हैं. इसका मतलब यह है कि NIFTY 50 में 50 शेयर जरूर हैं, लेकिन इंडेक्स की चाल काफी हद तक कुछ बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करती है.

2. सिर्फ निफ्टी ही नहीं, पूरे बाजार में यही ट्रेंड

यह कंसंट्रेशन सिर्फ निफ्टी 50 तक सीमित नहीं है. जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों , लार्ज कैप म्यूचुअल फंड, LIC, EPFO और F&O बाजार में भी बड़ी हिस्सेदारी कुछ चुनिंदा कंपनियों में ही केंद्रित है. निफ्टी 50 और EPFO ETF में टॉप 5 कंपनियों का वेटेज 41% है, जबकि लार्ज कैप म्यूचुअल फंड में यह 42% और LIC के पोर्टफोलियो में 35% है. सबसे ज्यादा कंसंट्रेशन F&O बाजार में दिखता है, जहां सिर्फ पांच शेयरों में 65% कारोबार होता है. इससे साफ है कि अलगअलग निवेशकों और संस्थानों का पैसा आखिरकार उन्हीं कुछ बड़े शेयरों में पहुंच रहा है. ऐसे में इन शेयरों में बड़ी गिरावट आने पर उसका असर पूरे बाजार और करोड़ों निवेशकों के पोर्टफोलियो पर एक साथ पड़ सकता है.

3. क्या डायवर्सिफिकेशन सिर्फ एक भ्रम बनता जा रहा है?

बाजार के जानकार मानते हैं कि केवल अलगअलग म्यूचुअल फंड खरीद लेना ही डायवर्सिफिकेशन नहीं है. अगर सभी फंडों की टॉप होल्डिंग एक जैसी है तो निवेशक का जोखिम कम नहीं होता. कई निवेशकों के पास 56 म्यूचुअल फंड होते हैं, लेकिन उनमें मौजूद टॉप 10 शेयर लगभग एक जैसे निकलते हैं. ऐसे में पोर्टफोलियो दिखने में बड़ा होता है, लेकिन जोखिम कुछ ही कंपनियों पर टिका रहता है.

4. नियामक क्या बदलाव कर सकते हैं?

  • NIFTY 50 के साथ Equal Weight Index को भी मुख्य विकल्प बनाया जाए.
  • EPFO के ETF निवेश में सिर्फ Market Cap आधारित इंडेक्स पर निर्भरता कम हो.
  • इक्विटी म्यूचुअल फंड में न्यूनतम Mid Cap एक्सपोजर तय किया जाए.
  • F&O बाजार में किसी एक शेयर के टर्नओवर की अधिकतम सीमा तय की जाए.
  • Large Cap फंडों के लिए भी नियमित Stress Test अनिवार्य किया जाए.
  • फंड हाउस की लिक्विडिटी क्षमता की समयसमय पर जांच हो.

5. निवेशक खुद क्या कर सकते हैं?

पहले अपना पोर्टफोलियो जांचें अगर आपके पास कई म्यूचुअल फंड हैं तो सभी की Top 10 Holdings निकालकर देखें. यदि 78 शेयरों में आपके कुल निवेश का 35% या उससे अधिक हिस्सा है तो आपका पोर्टफोलियो जरूरत से ज्यादा केंद्रित हो सकता है.

सिर्फ Large Cap पर निर्भर न रहें नया SIP Flexi Cap, Multi Cap या Multi Asset Fund में शुरू करने पर विचार किया जा सकता है. इससे अलगअलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश बढ़ता है.

Equal Weight Index पर भी नजर रखें सामान्य निफ्टी 50 में बड़ी कंपनियों का वेट ज्यादा होता है, जबकि Equal Weight Index में सभी 50 कंपनियों का लगभग समान वेट रहता है. इससे कुछ चुनिंदा शेयरों पर निर्भरता कम होती है.

विदेशों में भी निवेश करें पोर्टफोलियो का 1015% हिस्सा Global Index Funds या International Funds में रखने से केवल भारतीय बाजार पर निर्भरता कम हो सकती है.

गोल्ड को भी दें जगह एक्सपर्ट पोर्टफोलियो का 1015% हिस्सा Gold ETF या अन्य गोल्ड निवेश विकल्पों में रखने की सलाह देते हैं. बाजार में ज्यादा उतारचढ़ाव के दौरान गोल्ड जोखिम कम करने में मदद कर सकता है.

SIP और म्यूचुअल फंड आज भी लंबी अवधि के निवेश का प्रभावी माध्यम हैं, लेकिन केवल अलगअलग फंड खरीद लेना पर्याप्त नहीं है. निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि उनके फंड किन कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. यदि अलगअलग स्कीमों के बावजूद पैसा बारबार उन्हीं 510 शेयरों में जा रहा है, तो वास्तविक डायवर्सिफिकेशन नहीं हो रहा. ऐसे में समयसमय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा, अलगअलग एसेट क्लास में निवेश और कंसंट्रेशन पर नजर रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है.

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