मध्य प्रदेश के भिंड जिले से नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए पुलिस लगातार जांचपड़ताल कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने इस हत्या की वारदात में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया है। साथ ही, मुख्य आरोपी सत्यप्रकाश को उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित प्रसिद्ध पचनदा पुल पर क्राइम सीन रिक्रिएशन के लिए ले जाया गया, जहां उसने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। हालांकि, घटना को बीते हुए आठ दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक मृतका स्नेहलता का शव बरामद नहीं किया जा सका है।

इस पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब मूल रूप से बिहार की रहने वाली स्नेहलता भिंड स्थित एक कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए आई थी। पढ़ाई के दौरान ही उसकी पहचान सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव से हुई, जो उसी कॉलेज में मैनेजमेंट का हिस्सा था। धीरेधीरे दोनों की यह पहचान गहरी हुई और यह मुलाकात प्यार में बदल गई। इसके बाद स्नेहलता और सत्यप्रकाश लिवइन रिलेशनशिप में एक साथ रहने लगे। लेकिन इस रिश्ते में पेच तब फंसा जब यह बात सामने आई कि सत्यप्रकाश पहले से ही शादीशुदा था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लिवइन में रहने के दौरान ही स्नेहलता प्रेग्नेंट हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। मां बनने के बाद स्नेहलता लगातार सत्यप्रकाश पर अपनी और बच्चे की सामाजिक सुरक्षा के लिए शादी करने का दबाव बनाने लगी। सत्यप्रकाश हर बार इस बात को टालता रहा, लेकिन जब स्नेहलता का दबाव अत्यधिक बढ़ने लगा, तो उसने उसे अपने रास्ते से हमेशा के लिए हटाने का खौफनाक प्लान बना लिया।

परिजनों की शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर भिंड पुलिस ने मुख्य आरोपी सत्यप्रकाश को धर दबोचा। पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपी सत्यप्रकाश ने अपनी साजिश का पूरा पर्दाफाश करते हुए बताया कि वह कॉलेज में छात्रों को दाखिला दिलाने के नाम पर अलगअलग जगहों पर प्रचार के लिए जाया करता था। इसी सिलसिले में उसने कानपुर जाने की योजना बनाई थी। उसने स्नेहलता को अपने जाल में फंसाते हुए कहा कि वह कॉलेज के काम से कानपुर प्रचार के लिए जा रहा है, इसलिए वह भी उसके साथ चले, जहां वे दोनों मिलकर थोड़ी शॉपिंग भी कर लेंगे। आरोपी की इस चिकनीचुपड़ी बातों में आकर स्नेहलता उसके साथ जाने के लिए आसानी से तैयार हो गई।

जैसे ही स्नेहलता कानपुर जाने के लिए राजी हुई, सत्यप्रकाश ने अपने दो अन्य परिचितों, जिनमें एंबुलेंस ड्राइवर राजवीर खन्ना और गोलू जाटव शामिल थे, के साथ मिलकर उसकी हत्या की खतरनाक साजिश रच डाली। इसके बाद आरोपियों ने कॉलेज के ही एक दलाल की कार ली और उसके जरिए कानपुर के लिए रवाना हो गए। अभी वे रास्ते में ही थे कि योजना के मुताबिक आरोपियों ने मौका पाकर स्नेहलता पर हमला कर दिया और गाड़ी के अंदर ही उसका गला घोंटकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपी नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता के शव को कार में ही रखकर काफी देर तक इधरउधर घूमते रहे। फिर रात के करीब तीन बजे तीनों ने मिलकर यह तय किया कि शव को ठिकाने लगाने के लिए यमुना नदी में फेंक दिया जाए, क्योंकि वहां मगरमच्छ रहते हैं और इससे किसी को कभी शक भी नहीं होगा कि शव का क्या हुआ।

योजना के तहत, आरोपी रात के ठीक तीन बजे इटावा जिले में स्थित यमुना नदी के पचनदा पुल पर पहुंचे और वहीं से स्नेहलता के शव को नीचे बहती नदी में फेंक दिया। क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान आरोपी सत्यप्रकाश ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने शव के साथ मृतका का मोबाइल फोन भी वहीं पुल से नीचे नदी में फेंक दिया था। उसका मानना था कि नदी के मगरमच्छ शव को पूरी तरह अपना निवाला बना लेंगे, जिससे इस हत्याकांड का कोई भी सबूत या निशान बाकी नहीं बचेगा और किसी को कभी इस सच का पता नहीं चल पाएगा।

इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिए हुए आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस और राहत टीमों के अथक प्रयासों के बावजूद नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता का शव अभी तक नहीं मिल पाया है। पुलिस की विशेष टीमें, स्थानीय गोताखोर और डिजास्टर फोर्सेस लगातार यमुना नदी के ठिकानों पर शव की तलाश में जुटी हुई हैं, मगर अब तक उनके हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। पुलिस और जांच अधिकारियों द्वारा लगातार यह गहरी आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं मगरमच्छों ने सचमुच शव को अपना निवाला तो नहीं बना लिया है। फिलहाल, पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में हत्या में इस्तेमाल की गई कार को अपने कब्जे में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है।