हर महीने सैलरी आने के बाद ज्यादातर लोग अपनी बचत सेविंग्स अकाउंट में ही छोड़ देते हैं. कई लोगों के खाते में 10 लाख, 20 लाख या इससे भी ज्यादा रकम लंबे समय तक पड़ी रहती है. उन्हें लगता है कि बैंक में पैसा पूरी तरह सुरक्षित है, इसलिए किसी तरह का जोखिम नहीं है. लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पैसा लंबे समय तक सेविंग्स अकाउंट में रखना फायदे का नहीं, बल्कि नुकसान का सौदा साबित हो सकता है.

महंगाई कम कर देती है आपकी बचत की असली कीमत
आज अधिकांश बैंक सेविंग्स अकाउंट पर करीब 2.5% से 3% सालाना ब्याज देते हैं, जबकि लंबे समय में महंगाई की औसत दर 5% से 6% के बीच रहती है. इसका मतलब है कि आपका बैंक बैलेंस भले ही बढ़ता हुआ दिखाई दे, लेकिन उस पैसे की खरीदने की ताकत लगातार घटती जाती है. यानी भविष्य में उसी रकम से आप आज के मुकाबले कम सामान या सेवाएं खरीद पाएंगे.
आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमिताभ लारा का कहना है कि सेविंग्स अकाउंट का इस्तेमाल इमरजेंसी फंड रखने के लिए करना चाहिए, न कि लंबे समय तक बड़ी रकम जमा रखने के लिए. उनका मानना है कि सिर्फ मूलधन सुरक्षित रखना काफी नहीं है, बल्कि उसकी खरीदने की क्षमता भी बची रहनी चाहिए.
10 लाख रुपये का उदाहरण समझिए
मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये सेविंग्स अकाउंट में रखे हैं और उस पर 2.5% सालाना ब्याज मिल रहा है. 10 साल बाद यह रकम करीब 12.8 लाख रुपये हो जाएगी. लेकिन अगर इसी दौरान महंगाई 6% सालाना रही, तो आज जैसी जीवनशैली बनाए रखने के लिए करीब 17.9 लाख रुपये की जरूरत होगी. यानी आपकी बचत करीब 5 लाख रुपये पीछे रह जाएगी.
बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, असली सवाल यह नहीं है कि आपकी बचत बढ़ी या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वह आपके वित्तीय लक्ष्य पूरे करने के लिए पर्याप्त बढ़ी है.
कितना पैसा सेविंग्स अकाउंट में रखना चाहिए?
वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि सेविंग्स अकाउंट में सिर्फ 6 से 12 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड ही रखें. इसके अलावा जो पैसा निकट भविष्य में इस्तेमाल नहीं होना है, उसे लिक्विड फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, डेट फंड या लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी जैसे निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है. इससे बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है और महंगाई के असर से भी काफी हद तक बचाव होता है.


