विदेश मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत सुधाकर दलेला नेपाल में भारत के अगले राजदूत होंगे. दलेला नवीन श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है और वो सेवानिवृत्त हो गए हैं. एक दिन पहले ही नेपाल ने भारत में अपने राजदूत के रूप में निश्चल नाथ पांडे के नाम को मंजूरी दी थी. सुधाकर दलेला की नेपाल में नियुक्ति को भारतनेपाल संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. दलेला ने ब्रिक्स घोषणापत्र के लिए बातचीत का नेतृत्व किया था, आइये जानते हैं कौन हैं सुधाकर दलेला.

विदेश मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी बयान के मुताबिक सुधाकर दलेला , जो वर्तमान में विदेश मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं, को नेपाल में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि उम्मीद है कि वे जल्द ही अपना कार्यभार संभाल लेंगे. ये नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब नई दिल्ली और काठमांडू, अगले महीने प्रधानमंत्री बालेन शाह की भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा की योजना बनाने के लिए काम कर रहे हैं.

बालेन शाह के नवंबर में भारत दौरे पर आने की संभावना

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के नवंबर में भारत दौरे पर आने की संभावना है. सुधाकर दलेला को नेपाल के साथ संबंधों और कूटनीतिक मामलों का अच्छा अनुभव है. उनकी नियुक्ति से दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों और द्विपक्षीय परियोजनाओं पर बातचीत को गति मिलने की उम्मीद है.

सुर्खियों में रहे सुधाकर दलेला

सुधाकर दलेला हाल ही में BRICS शिखर सम्मेलन की घोषणा पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने को लेकर चर्चा में रहे थे.
BRICS के मुख्य वार्ताकार के रूप में दलेला ने बातचीत की अगुवाई की और सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई. बहुपक्षीय वार्ताओं में उनका अनुभव नेपाल में भारत के राजदूत के रूप में भी उपयोगी माना जा रहा है.

सुधाकर दलेला का सफर

सुधाकर दलेला भारतीय विदेश सेवा के 1993 बैच के अधिकारी हैं. वह फिलहाल विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव के पद पर कार्यरत हैं. 2022 से 2025 तक भूटान में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत थे.

पिछले साल सितंबर में, उन्हें आर्थिक संबंधों का सचिव नियुक्त किया गया था. इस भूमिका में वे भारत की आर्थिक कूटनीति, ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ विकास साझेदारी और बहुपक्षीय आर्थिक संबंधों को संभाल रहे थे. वे ब्रिक्स , इब्सा और I2U2 के लिए भारत के ‘शेरपा’ भी रहे हैं.

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ब्रिक्स के देशों के बीच मतभेद और ध्रुवीकरण की स्थिति थी, ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच की दूरी को पाटना भारत के लिए एक कठिन काम था। ब्रिक्स घोषणापत्र तैयार करना कूटनीतिक रूप से एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य माना जा रहा था. लेकिन, ब्रिक्स शेरपा के रूप में दलेला ने वार्ताकारों की एक टीम का नेतृत्व किया और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने में सफलता हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप यह घोषणापत्र तैयार हो सका.

कई अहम पदों पर किया काम

सुधाकर दलेला ने नई दिल्ली में कई अहम पदों पर काम किया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान वे प्रधानमंत्री कार्यालय में निदेशक रहे. इस दौरान उनका मुख्य फोकस दक्षिण एशियाई पड़ोसियों, पूर्वी एशिया, हिंदप्रशांत क्षेत्र, खाड़ी देशों, मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों पर था.

उन्होंने 200607 में निदेशक के रूप में काम किया. इसके बाद, 2016 से 2019 के बीच वे विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे, जहां उन्होंने भूटान और नेपाल के साथ भारत के संबंधों को संभाला.

तेल अवीव से राजनयिक करियर की शुरुआत

दलेला ने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत तेल अवीव से की थी. इसके बाद उन्होंने ब्रासीलिया, ढाका, शिकागो और वाशिंगटन में विभिन्न पदों पर काम किया. अमेरिका में वह शिकागो में भारत के महावाणिज्यदूत रहे. 2011 से 2014 तक वाशिंगटन में राजनीतिक मामलों के मंत्री और 2020 से 2022 तक भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाली.

काठमांडू में सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति पिछली प्रथा से एक कदम आगे है. इससे पहले भारत आमतौर पर अतिरिक्त सचिव रैंक के अधिकारियों को काठमांडू भेजता था. भारतीय राजदूत के स्तर में यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि पड़ोसी देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अब अधिक महत्व दिया जा रहा है. शुक्रवार शाम को दलेला की नियुक्ति की घोषणा करते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा कि उम्मीद है कि वे जल्द ही अपना कार्यभार संभाल लेंगे.

आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर

नेपाल में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और नेपाल दोनों ही आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने, लंबित विवादों को सुलझाने और विकास परियोजनाओं को गति देने की दिशा में काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि नवंबर में प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत का दौरा करेंगे. इस दौरान दोनों पक्ष बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और व्यापार के साथसाथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों और नए हवाई मार्गों पर बातचीत की तैयारी कर रहे हैं.