मुंबई में रक्तदान शिविर के दौरान डोनर्स को कंपनी गिफ्ट मैं घड़ियां देने के मामले में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तीन ब्लड सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की है. जांच में सामने आया कि रक्तदान शिविर के प्रचार में डोनर्स को घड़ी देने का वादा किया गया था. इसके बाकायदा पंपलेट छपवाए गए थे. कुछ डोनर्स ने जांच अधिकारियों को घड़ी मिलने की पुष्टि भी की.

इस कार्रवाई की जद में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ब्लड सेंटर, भायखला स्थित डीन ग्रांट मेडिकल कॉलेज एवं सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स का ब्लड सेंटर और मुंबई सेंट्रल स्थित बीवाईएल नायर चैरिटेबल हॉस्पिटल का ब्लड सेंटर शामिल है. एफडीए कमिश्नर ने बताया कि कानूनन रक्तदान करना स्वैच्छिक कार्य है, इसके लिए किसी भी प्रकार का प्रलोभन दिया जाना कानूनन जुर्म है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अप्रैल 2026 में मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर आयोजित एक रक्तदान शिविर से जुड़ा है. यह शिविर यंग स्टार कमेटी ने आयोजित किया था. शिविर के प्रचार में रक्तदान करने वालों को घड़ियां उपहार में देने की बात कही गई थी. शुरुआती जांच में शिविर के आयोजकों और संबंधित ब्लड सेंटरों ने उपहार बांटे जाने की जानकारी होने से इनकार किया था. हालांकि, FDA अधिकारियों ने जब कुछ रक्तदाताओं से संपर्क किया, तो उन्होंने घड़ियां मिलने की पुष्टि की. इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की गई.
ब्लड सेंटरों का निरीक्षण
FDA ने 22 अगस्त 2026 को संबंधित ब्लड सेंटरों का निरीक्षण किया. इसके बाद 2 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. संबंधित सेंटरों को 22 सितंबर को अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का मौका दिया गया. FDA के मुताबिक, ब्लड सेंटरों की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए. इसके बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के तहत उनके लाइसेंस निलंबित करने के आदेश जारी किए गए.
तीन ब्लड सेंटरों पर क्या कार्रवाई हुई?
- इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ब्लड सेंटर: लाइसेंस पांच दिनों के लिए निलंबित किया गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह निलंबन 9 से 13 अक्टूबर तक था.
- सर जेजे अस्पताल ब्लड सेंटर: लाइसेंस तीन दिनों के लिए निलंबित किया गया था. सेंटर ने आदेश के खिलाफ अपील की, जिसके बाद उसे अस्थायी राहत मिली.
- बी.वाई.एल. नायर अस्पताल ब्लड सेंटर: यहां भी तीन दिनों के निलंबन का आदेश जारी हुआ. अपील के बाद इस आदेश पर भी अस्थायी रोक लग गई.
- इस तरह, जेजे और नायर अस्पताल के ब्लड सेंटरों को फिलहाल अस्थायी राहत मिली है.
कानूनों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन
महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि रक्तदान सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता की सेवा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है. रक्तदान के लिए किसी भी तरह का उपहार या प्रलोभन नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लड सेंटरों को संबंधित कानूनों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा.
तुकाराम मुंढे के मुताबिक, रक्तदान शिविर आयोजित करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों की भी जांच की गई. उन्होंने कहा कि कोई एनजीओ अपने स्तर पर अकेले रक्तदान शिविर आयोजित नहीं कर सकता. शिविर के आयोजन में अधिकृत ब्लड सेंटर की भूमिका और निर्धारित प्रावधानों का पालन जरूरी है.
राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्वैच्छिक रक्तदान के लिए रक्तदाताओं को उपहार या किसी अन्य तरह का प्रलोभन नहीं दिया जाना चाहिए. रक्तदान का मकसद जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना है, न कि किसी वस्तु के बदले रक्त जुटाना है.
उपहार का लालच देकर रक्तदान कराना गलत
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तदान पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए. उपहार का लालच देकर रक्तदान कराने से इस व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित हो सकती है. इसलिए रक्तदान शिविरों में नियमों का पालन और निगरानी बेहद जरूरी है. इस मामले में खास बात यह है कि कार्रवाई केवल निजी संस्थानों तक सीमित नहीं रही. सरकारी ग्रांट मेडिकल कॉलेज एवं सर जेजे समूह के अस्पताल और बीएमसी संचालित नायर अस्पताल से जुड़े ब्लड सेंटर भी कार्रवाई के दायरे में आए.



