Indonesia Stock Market: दक्षिणपूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को भूचाल आ गया. बाजार खुलते ही निवेशकों ने इस कदर बिकवाली शुरू की कि पिछले तीन दशक का रिकॉर्ड टूट गया. इस भारी तबाही की वजह ग्लोबल इंडेक्स फर्म MSCI का एक चौंकाने वाला फैसला है. फर्म ने साफ कह दिया है कि इंडोनेशिया अब ‘इमर्जिंग मार्केट’ यानी उभरते बाजार के दर्जे के लायक नहीं रहा. इस एक बयान ने बाजार की कमर तोड़ दी है. हालत ये हो गई है कि देश से अरबों डॉलर का विदेशी निवेश बाहर निकलने का खतरा पैदा हो गया है.

बाजार खुलते ही मची चीखपुकार

शुक्रवार की सुबह इंडोनेशिया के शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही. बाजार खुलते ही बेंचमार्क इंडेक्स 8 फीसदी लुढ़क गया. गिरावट इतनी तेज थी कि प्रशासन को तुरंत 30 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी. जब कारोबार दोबारा शुरू हुआ, तब भी बिकवाली का दबाव कम नहीं हुआ. देखते ही देखते इंडेक्स 11.4 फीसदी तक गोता लगा गया. ये नवंबर 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है. वहीं, एक दिन की गिरावट के लिहाज से देखें तो जनवरी 1998 के बाद ये सबसे बड़ा क्रैश है. इस भारी बिकवाली से जकार्ता के शेयरों में इस साल अब तक करीब 40 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. इसके साथ ही ये दुनिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर बाजार बन गया है.

दिग्गज बैंकों के शेयर औंधे मुंह गिरे

बाजार की इस सुनामी में देश के सबसे बड़े बैंक भी खुद को बचा नहीं पाए. बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक रक्यात इंडोनेशिया के अलावा बैंक मंदिरी के शेयरों में करीब 15 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. शेयर बाजार के साथसाथ देश की करेंसी को भी तगड़ा झटका लगा है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंडोनेशियाई रुपया कमजोर होकर 18,070 के स्तर पर आ गया. ये जुलाई के अंत के बाद का सबसे निचला स्तर है. अब ये अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 18,190 के बेहद करीब पहुंच गया है.

फिलिस्तीनयूक्रेन की कतार में खड़ा होने का खतरा

MSCI ने अपने फैसले से सबको चौंका दिया है. पहले चेतावनी दी गई थी कि इंडोनेशिया को ‘फ्रंटियर’ कैटेगरी में डाला जा सकता है, लेकिन अब फर्म ने इसे सीधे ‘स्टैंडअलोन मार्केट’ के रास्ते पर डाल दिया है. ये दर्जा फ्रंटियर से भी खराब माना जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा, ग्लोबल निवेशकों द्वारा ट्रैक किए जाने वाले कई प्रोडक्ट्स से भी इंडोनेशिया को बाहर करने की तैयारी है. अगर ये डाउनग्रेड लागू होता है, तो इंडोनेशिया अर्जेंटीना, लेबनान, फिलिस्तीन या यूक्रेन जैसे देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा. एशियाप्रशांत क्षेत्र में इस कैटेगरी में आने वाला ये इकलौता बाजार होगा.

इस ग्रुप में शामिल दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अर्जेंटीना है, जबकि इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था के मुकाबले उसका आकार आधा भी नहीं है. स्टैंडअलोन दर्जा मिलने के बाद इंडोनेशियाई शेयर उन ग्लोबल इंडेक्स से बाहर हो जाएंगे, जिनमें अरबों डॉलर का पैसिव निवेश लगा होता है. ऐसे में इन इंडेक्स को फॉलो करने वाले फंड्स को मजबूरन अपने शेयर बेचने पड़ेंगे. बैंक परमाटा के मुख्य अर्थशास्त्री जोसुआ परदेदे के मुताबिक, इंडोनेशिया को अब सिर्फ नए सुधारों की घोषणा करने के बजाय बाजार में पारदर्शिता लानी होगी. इसके अलावा नियमों को सख्ती से लागू करके दिखाना होगा. उनके अनुसार, डाउनग्रेड रोकना अभी जरूरी है, लेकिन असली लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए बाजार का भरोसा वापस जीतना होना चाहिए.

दूसरे एशियाई बाजारों का कैसा हाल

एक तरफ जहां इंडोनेशिया में हाहाकार मचा था, वहीं एशिया के दूसरे बाजारों में मिलाजुला असर देखने को मिला. दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क कोस्पी में पिछले सत्र के 6 महीने के निचले स्तर से थोड़ी रिकवरी दिखी. हालांकि, एआई से जुड़ी चिंताओं के चलते इस हफ्ते की शुरुआत में हुई भारी बिकवाली से ये 18 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की तरफ बढ़ रहा है. ताइवान के शेयरों में पिछले दिन की 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बाद हल्की बढ़त रही, लेकिन वहां का डॉलर कमजोर होकर 32.518 प्रति अमेरिकी डॉलर पर आ गया. दक्षिणपूर्व एशिया के अन्य देशों की बात करें तो सिंगापुर के बाजार में 0.8 फीसदी की तेजी रही, जबकि फिलीपींस के शेयर 2 फीसदी से ज्यादा चढ़े. उधर, मलेशिया के शेयरों में 0.7 फीसदी की गिरावट आई, हालांकि सरकारी अनुमान के मुताबिक तीसरी तिमाही में मलेशिया की अर्थव्यवस्था सालाना आधार पर 5.3 फीसदी बढ़ी है. वहीं छुट्टी होने की वजह से थाईलैंड का शेयर बाजार बंद रहा.