EPFO: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने हाल ही में एक बड़ी राहत का ऐलान किया है. केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत पांच दशक पुरानी व्यवस्था में अहम बदलाव करते हुए ‘कर्मचारी निक्षेप सहबद्ध बीमा योजना 2026’ को नोटिफाई कर दिया है. 29 जून से पूरे देश में लागू हो चुके इस नए कानून के तहत अब पीएफ खाताधारकों के परिवारों को 7 लाख रुपये के मुफ्त बीमा कवर के साथसाथ पीएफ बैलेंस के आधार पर 1 लाख रुपये का अतिरिक्त एश्योरेंस लाभ भी मिलेगा.

PF बैलेंस पर सीधा लाभ

नई EDLI 2026 योजना का सबसे बड़ा आकर्षण पीएफ बैलेंस से जुड़ा नया एश्योरेंस बेनिफिट है. नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी ईपीएफ सदस्य का दुर्भाग्यवश निधन हो जाता है, तो नॉमिनी को पीएफ खाते में जमा पूरी रकम तो मिलेगी ही, साथ ही एक तय फॉर्मूले से अतिरिक्त पैसा भी दिया जाएगा. अगर कर्मचारी का औसत पीएफ बैलेंस 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो परिवार को 50,000 रुपये की फिक्स्ड राशि मिलेगी. इसके ऊपर की रकम का 40% हिस्सा भी अतिरिक्त जोड़ा जाएगा. इस नए प्रावधान के तहत मिलने वाला यह सीधा लाभ अधिकतम 1 लाख रुपये तक तय किया गया है.

पुरानी सुरक्षा बरकरार

सरकार ने पुराने नियमों की अच्छाइयों को बरकरार रखते हुए लाइफ इंश्योरेंस के फायदे को सुरक्षित रखा है. अगर किसी कर्मचारी ने निधन से पहले लगातार 12 महीने तक काम किया है, तो उसका परिवार पुराने फॉर्मूले के तहत बीमे का हकदार होगा. इस क्लेम की गणना कर्मचारी के औसत मासिक वेतन के 35 गुना और औसत पीएफ बैलेंस के 50% हिस्से को मिलाकर की जाएगी. इसके तहत न्यूनतम 2.5 लाख रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये का क्लेम सुरक्षित रहेगा. कुछ खास परिस्थितियों में एश्योरेंस बेनिफिट में 20% की अतिरिक्त बढ़ोतरी का भी विकल्प रखा गया है.

नौकरी छूटने के 6 महीने बाद तक कवर रहेगा चालू

अक्सर पीएफ योगदान रुकने के बाद क्लेम मिलने में परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था. सरकार ने इस खामी को दूर करते हुए योजना का दायरा बढ़ा दिया है. अब अगर किसी ईपीएफ मेंबर की मृत्यु, कंपनी के रोल पर रहते हुए, आखिरी पीएफ कंट्रीब्यूशन के 6 महीने के भीतर हो जाती है, तो भी उसका परिवार 7 लाख रुपये के इंश्योरेंस क्लेम का पूरा हकदार माना जाएगा. यह कदम अनिश्चितता के दौर में परिवारों को बड़ी राहत देगा.

देरी पर अधिकारियों की जेब से कटेगा 12% ब्याज

ईपीएफओ ने दावों के निपटारे को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. अब सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ किए गए इंश्योरेंस क्लेम को 20 दिनों के भीतर सेटल करना अनिवार्य है. अगर कोई अधिकारी बिना किसी ठोस कारण के इस समयसीमा के भीतर क्लेम पास नहीं करता है, तो विभाग पीड़ित परिवार को 12% सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज देगा. यह जुर्माना सीधे देरी करने वाले अधिकारी की जेब से वसूला जाएगा. इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए 15 दिन के भीतर डिजिटल पेमेंट के जरिए इंश्योरेंस फंड जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है. क्लेम सबमिट करने से लेकर रिटर्न दाखिल करने तक की पूरी प्रक्रिया को अब 100% ऑनलाइन कर दिया गया है.