: दिल्ली में के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त और स्पष्ट माफी मांगी है। कमिश्नर की ओर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने दो हलफनामे दाखिल किए गए हैं। पुलिस ने कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना से इनकार करते हुए अवमानना नोटिस खत्म करने की मांग की है।

कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना से इनकार
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने हलफनामे में कहा है कि कोर्ट के आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं करने का कोई मामला नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उठाए गए कदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है और इसी के साथ कमिश्नर ने बिना शर्त माफी मांगी है।
#BREAKING : Delhi Police Commissioner Anurag Kumar tenders “unconditional and unqualified apology” to Supreme Court in contempt case over curbs during Cockroach Janta Party protest.
Two affidavits filed before CJI Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi:
• Denies any “wilful or… pic.twitter.com/1gC9HFUHWb
— Bar and Bench October 15, 2026
सिर्फ 4 किलोमीटर क्षेत्र में बंद था मोबाइल इंटरनेट
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पूरे दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट बंद नहीं किया गया था। Cellular Internet को केवल रायसीना हिल के आसपास करीब 4 किलोमीटर के क्षेत्र में निलंबित किया गया था।
पुलिस ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि प्रदर्शन की स्थिति को देखते हुए मेट्रो सेवाओं को लेकर भी कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे।
57 से घटाकर 45 मेट्रो स्टेशनों पर लगी रोक
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या 57 से घटाकर 45 कर दी गई थी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद 10 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे तक Metro Services पूरी तरह बहाल कर दी गई थीं।
हिरासत में लिए लोगों को 2 से 6 घंटे में छोड़ा
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को 2 से 6 घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया था। हलफनामे में कहा गया कि हिरासत में रखे गए लोगों को “hot, fresh and good meals” उपलब्ध कराए गए।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए राजनीतिक नेताओं को SHO Chambers में बैठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में नोटिस लगाने से इनकार
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि के अंदर कोई नोटिस नहीं चिपकाया गया था। यह स्पष्टीकरण प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर उठे सवालों के जवाब में दिया गया है।
20 जुलाई के मार्च में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में 20 जुलाई के ‘Chalo Sansad’ March का भी जिक्र किया है। पुलिस का दावा है कि उस दौरान 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ी थी।
Contempt Notice खत्म करने की मांग
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ जारी Contempt Notice को डिस्चार्ज करने की मांग की है। उन्होंने अदालत के सामने Unconditional and Unqualified Apology पेश करते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई।
अब सुप्रीम कोर्ट पुलिस की ओर से दाखिल दोनों हलफनामों और माफी पर विचार करेगा। मामले में आगे कोर्ट की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अवमानना नोटिस पर क्या फैसला लिया जाता है।



