देश में बच्चों या बड़ों के लिए स्नैक्स मार्केट काफी बड़ा है. खासकर बच्चों का स्नैक्स बनाने वाली कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है. ऐसा ही एक स्नैक ‘नटखट’ की धूम पूरे मार्केट में मची हुई है. इसका प्रमुख कारण इस स्नैक को बनाने वाली कंपनी का बिकना है. वास्तव में US की प्राइवेट इक्विटी फर्म ‘एडवेंट इंटरनेशनल’ ने ‘नटखट’ और क्रैक्स बनाने वाली कंपनी ‘DFM फूड्स’ से बाहर निकलने की तैयारी कर रही है. इसका मतलब है कि अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है. इसके लिए देश की कई दिग्गज कंपनियां लाइन में लग गई है. खास बात तो ये है कि कंपनी में अमेरिकी फर्म की हिस्सेदारी करीब 97 फीसदी है. जिसे वो पूरा बेचेगी. इसके लिए अमेरिकी फर्म ने कुछ कंपनियों से बातचीत भी शुरू कर दी है.

किन किन कंपनियों से चल रही बात

एडवेंट ITC, मैरिको , ब्रिटानिया , लोटे और लिवेवे फूड्स जैसी कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है. लिवेवे फूड्स दक्षिण एशियाई स्नैक ब्रांड ‘ओइशी’ बनाती है. अधिकारियों ने बताया कि बातचीत में शामिल PE फर्मों में केदारा कैपिटल और CVC कैपिटल पार्टनर्स भी शामिल हैं. ईटी की रिपोर्ट में एक अधिकारी ने कहा कि एडवेंट ने संभावित खरीदारों से संपर्क किया है, जिनमें स्ट्रैटेजिक और प्राइवेट इक्विटी फर्म दोनों शामिल हैं, और अभी बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यह डील दिसंबर तक पूरी हो जाएगी.

अवेंडस कैपिटल 2019 में खरीदी थी कंपनी

एडवेंट ने इस संभावित डील के लिए अवेंडस कैपिटल और EY को नियुक्त किया है. इस PE फर्म ने 2019 में वेस्टब्रिज कैपिटल से DFM फूड्स में बड़ी हिस्सेदारी 118.8 मिलियन डॉलर में खरीदी थी. जनवरी 2023 में, एडवेंट ने DFM को डीलिस्ट कर दिया था. कंपनी की हालिया सालाना रिपोर्ट के अनुसार, DFM फूड्स की कुल बिक्री वित्त वर्ष 2025 में 27.5 फीसदी बढ़कर 705.8 करोड़ रुपए हो गई. दूसरे अधिकारी ने बिना ज्यादा जानकारी दिए बताया कि वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ग्रोथ 30 फीसदी से ज्यादा रही. वैसे अभी तक संभावित खरीदारों में किसी का कोई बयान सामने नहीं आया है.

42 साल पुरानी है कंपनी

1984 में स्थापित DFM फूड्स अपने मुख्य ब्रांड ‘क्रैक्स’ के अलावा कर्ल्स , फ्रिट्स और नटखट जैसे स्नैक्स भी बनाती है. ये स्नैक्स पोटैटो चिप्स, ट्रेडिशनल स्नैक्स और मिलेट बेस्ड वैरायटी जैसे फॉर्मेट में आते हैं. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, इसकी फैक्ट्रियां गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, काशीपुर और हावड़ा में हैं. तीसरे अधिकारी ने कहा, “वैल्यूएशन के अलावा, जिसे अभी तय किया जा रहा है, यह संभावित डील ब्रांड के स्केल और डिस्ट्रीब्यूशन की ताकत पर निर्भर करेगी. साथ ही, यह डील इस बात पर भी निर्भर करेगी कि ब्रांड ‘मज़ेदार’ और ‘हेल्दी’ स्नैकिंग के बीच के अंतर को कितना कम कर पाता है, क्योंकि कंज्यूमर का झुकाव इसी तरफ हो रहा है.

तेजी से बदल रहा पैक्ड स्नैक्स मार्केट

भारत के पैक्ड स्नैक्स मार्केट में तेज़ी से बदलाव हो रहा है. इसमें कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है और डिजिटलफर्स्ट व रीजनल ब्रांड्स की संख्या बढ़ रही है. इसे क्विक कॉमर्स, मौजूदा कंपनियों द्वारा नए निवेश और हेल्थएंडवेलनेस स्नैक्स की मांग से बढ़ावा मिल रहा है. इन वजहों से मर्जर और एक्विजिशन में भी तेजी देखी जा रही है. EY की मर्जर और एक्विजिशन इंडिया रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2025 में कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और रिटेल सेक्टर में सबसे ज्यादा 393 डील्स हुईं, इसके बाद टेक्नोलॉजी सेक्टर में 354 डील्स हुईं.

स्नैक्स मार्केट में लगातर बढ़ रही दिलचस्पी

मार्च 2025 से, चार बाहरी निवेशकों ने हल्दीराम स्नैक्स फूड में हिस्सेदारी खरीदी है. जिसमें हिंदुस्तान यूनिलीवर के पूर्व CEO संजीव मेहता समर्थित एल कैटरटन , टेमासेक , अल्फा वेव ग्लोबल और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी शामिल हैं. इन निवेशों से भारत की सबसे बड़ी स्नैक्स बनाने वाली कंपनी की वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है.

वहीं, एडवेंट ने इस साल मई में फ्रोजन फूड बनाने वाली कंपनी इस्कोन बालाजी फूड्स में 150 मिलियन डॉलर में एक बड़ी माइनॉरिटी हिस्सेदारी खरीदी. इससे पहले इसी साल, एक और ग्लोबल PE फर्म, जनरल अटलांटिक ने गुजरात की पैक्ड स्नैक्स बनाने वाली कंपनी बालाजी वेफर्स में लगभग 2,500 करोड़ रुपए में 7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी, जिससे बालाजी वेफर्स की वैल्यूएशन 35,000 करोड़ रुपए आंकी गई.

रिसर्च फर्म IMARC ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय स्नैक्स मार्केट, जिसकी वैल्यू 2025 में 50,590 करोड़ रुपए थी, 2034 तक सालाना बिक्री के मामले में 1,03,556 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है. यह 8.28 फीसदी की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ेगा.