Bihar Boat Accident: बिहार के वैशाली जिले का राघोपुर इलाका इन दिनों प्रकृति के रौद्र रूप और प्रशासनिक उदासीनता की दोहरी मार झेल रहा है. बाढ़ के पानी ने इस पूरे क्षेत्र को ऐसा दर्द दिया है, जिसके जख्म शायद ही कभी भर सकें. हालात यह हैं कि बाढ़ के थमते ही आई एक और आफत ने पूरे इलाके को मातम में डुबो दिया.

राघोपुर बिहार के हाईप्रोफाइल राजनीतिक चेहरे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का विधानसभा क्षेत्र है. हर साल आने वाली बाढ़ इस इलाके के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं होती. इस बार भी प्रखंड की 20 पंचायतों के 76 गांव पानी से घिरे रहे, लेकिन सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था के सारे दावे कागजी साबित हुए. प्रशासन और अंचल स्तर पर पर्याप्त नावों, गोताखोरों और एसडीआरएफ की तैनाती न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

25 से अधिक लोगों की मौत

बाढ़ के इस दौर में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान लगातार हादसों की खबरें आती रहीं. बाढ़ के पानी में डूबने से अब तक 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. कभी यजमान के घर जा रहे 55 वर्षीय सुरेंद्र ठाकुर गहरे पानी में समा गए, तो कभी दरवाजे पर खेल रही 15 महीने की मासूम प्रीति कुमारी काल के गाल में समा गई.

23 अगस्त से शुरू हुआ यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं लिया, कभी भैंस धोते हुए बुजुर्ग हुलास राय की मौत हुई, तो कभी कच्ची दरगाह से लौट रहे राजमिस्त्री विनय कुमार ढाब में डूब गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 8 सितंबर को तो तेरसिया दियारा से आ रही नाव पानी में छिपे बोल्डर से टकराकर डूब गई, जिसमें दो लोगों की जान चली गई. मौतों का यह खौफनाक सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि 13 अक्टूबर की रात राघोपुर में हुए एक और वीभत्स नाव हादसे ने तो जैसे सब कुछ तबाह कर दिया.

प्रशासनिक व्यवस्था की खुली पोल

एक ही खानदान के 13 बच्चों की पानी में डूबकर हुई दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. यह हादसा चीखचीखकर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रहा है, जहां जरा सी सतर्कता और पुख्ता इंतजाम कई मासूम जिंदगियों को बचा सकते थे. जब तक पानी के बीच छोटे नावों या डेंगी से सफर करने की मजबूरी रहेगी, तब तक ऐसे हादसे बारबार इस वीआईपी इलाके के माथे पर कलंक की तरह उभरते रहेंगे.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल बाढ़ और उससे होने वाली दर्जनों मौतों के बावजूद इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जाता? राघोपुर की इस त्रासदी ने एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है.