हाल ही में, ITAT मुंबई में एक मामला सामने आया जिसमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक महिला के घर और उसके बैंक लॉकर की तलाशी ली. इस दौरान विभाग ने उसके हीरे, सोनेचांदी की चीजें और गहने जब्त कर लिए और उन्हें ‘बिना स्पष्ट स्रोत वाली संपत्ति’ माना. तलाशी में कुल मिलाकर 427.71 ग्राम वजन के सोने के गहने, 258 ग्राम शुद्ध सोना, 161.33 ग्राम सोने वाले हीरे के गहने और 11.200 किलोग्राम वजन की चांदीमिश्रित वस्तुएं मिलीं.

जब इन चीजों के लिए पैसे के स्रोत के बारे में पूछा गया, तो महिला ने बताया कि ये संपत्तियां कई दशकों में शादी के तोहफों, स्त्रीधन, विरासत, पारिवारिक रीतिरिवाजों के तहत मिले तोहफों और खरीदफरोख्त से जमा हुई थीं. उसकी शादी को 35 साल से ज्यादा हो चुके थे और उसने ऐसे विवरण भी दिए जिनसे पता चला कि पांच संबंधित असेसमेंट वर्षों में परिवार की कुल ग्रॉस इनकम लगभग 4.55 करोड़ रुपए थी.
CBDT की गाइडलाइन नंबर 1916 का हवाला
इनकम टैक्स असेसिंग ऑफिसर ने उसके स्पष्टीकरण को आंशिक रूप से स्वीकार किया और CBDT की गाइडलाइन नंबर 1916 का हवाला दिया. इस निर्देश के अनुसार, इनकमटैक्स तलाशी के दौरान जब्ती के लिए टैक्स कानून में सोने के गहनों की कुछ सीमाएं तय की गई हैं. जिसमें शादीशुदा महिला के लिए 500 ग्राम, अविवाहित महिला के लिए 250 ग्राम और परिवार के पुरुष सदस्य के लिए 100 ग्राम शामिल है. आखिरकार, वह ITAT मुंबई में यह केस पूरी तरह से जीत गई.
ITAT मुंबई ने फैसला सुनाया कि एक ही परिवार की संपत्ति के हिस्से के तौर पर आम सोने के गहनों और हीरे जड़े सोने के गहनों को तो स्वीकार करना, लेकिन सिर्फ उनके फिजिकल फॉर्म की वजह से शुद्ध सोने को ‘बिना स्पष्टीकरण वाला’ मानना सही नहीं है. ITAT मुंबई ने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने खरीद बिल न होने को निर्णायक नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब स्पष्टीकरण शादी में मिले तोहफों, विरासत और कई दशकों में जमा की गई संपत्ति पर आधारित हो.
टैक्स छूट या कानूनी सीमा तय नहीं
ITAT मुंबई ने यह भी कहा कि CBDT के निर्देश संख्या 1916 में गहनों की संपत्ति के लिए कोई पक्की टैक्स छूट या कानूनी सीमा तय नहीं की गई है. बल्कि, निर्देश में बताई गई मात्राएं एक व्यावहारिक पैमाना देती हैं जिससे यह तय किया जा सके कि परिवार के पास मौजूद गहनों को उचित रूप से ‘स्पष्ट’ माना जा सकता है या नहीं.
हालांकि, ITAT मुंबई ने साफ तौर पर स्पष्ट किया कि शुद्ध सोने पर उसका फैसला केवल उस खास मामले के फैक्ट्स तक ही सीमित था और इसे एक सामान्य नियम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए कि सारा सोना या शुद्ध सोना अपनेआप CBDT के निर्देश संख्या 1916 के दायरे में आ जाता है.
घर में कितनी शुद्ध चांदी और सोने के गहने रख सकते हैं?
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि कोई व्यक्ति घर या बैंक लॉकर में कितना सोना या चांदी रख सकता है, इस पर कोई कानूनी सीमा तय नहीं है.
सुराना कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति कितनी भी मात्रा में सोनाचांदी रख सकता है, बशर्ते उसे कानूनी तरीके से हासिल किया गया हो और वह व्यक्ति उसके स्रोत के बारे में संतोषजनक जानकारी दे सके.
सुराना के अनुसार, सोने के गहनों के मामले में, CBDT के निर्देश नंबर 1916 में इनकम टैक्स की तलाशी के दौरान जब्ती के लिए कुछ मानक शादीशुदा महिला के लिए 500 ग्राम, अविवाहित महिला के लिए 250 ग्राम और परिवार के पुरुष सदस्य के लिए 100 ग्राम तय किए गए हैं.
सुराना कहते हैं कि इन सीमाओं को पूरी तरह से टैक्सफ्री मालिकाना हक की सीमा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि न्यायिक अधिकारी फिर भी इनके स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण मांग सकते हैं.
चांदी की चीजों के लिए, उक्त निर्देश में कोई खास मात्रात्मक मानक तय नहीं किया गया है. सुराना बताते हैं कि ITAT मुंबई के एक मामले में, टैक्स ट्रिब्यूनल ने 11.2 किलोग्राम चांदीमिश्रित चीज़ों को स्वीकार किया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके लिए महिला की शादी की लंबी अवधि, पारंपरिक रूप से जमा की गई चीज़ों, विरासत और परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा गया था.
हालांकि, यह फैसला उस मामले के खास तथ्यों पर आधारित था और इसे चांदी रखने की सामान्य स्वीकार्य सीमा तय करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसलिए, सुराना का कहना है कि अगर बड़ी मात्रा में सोना, चांदी या बुलियन रखा गया है, तो समझदारी इसी में है कि उनकी खरीद, विरासत, उपहार या लंबे समय से परिवार के पास होने के सबूत या दस्तावेज संभालकर रखे जाएं.



