ऊना। हिमाचल प्रदेश ने अपनी एक होनहार और कर्तव्यनिष्ठ महिला जवान को खो दिया है। ऊना जिले के गगरेट क्षेत्र के जोह गांव की रहने वाली सीमा सुरक्षा बल (BSF) की हेड कांस्टेबल अंजना कुमारी का निधन हो गया। मंगलवार को जब उनकी पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के मोक्षधाम में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। BSF के जवानों ने अपनी साथी महिला जवान को सशस्त्र सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वहां मौजूद परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

 

अंजना कुमारी जम्मू में BSF की 141वीं बटालियन में तैनात थीं। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें पहले जम्मू और बाद में चंडीगढ़ में उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

मंगलवार को जोह गांव के मोक्षधाम में अंजना कुमारी का अंतिम संस्कार किया गया। खड़का कैंप से पहुंची BSF की विशेष टुकड़ी ने सैन्य परंपराओं के अनुरूप उन्हें सशस्त्र सलामी दी। देश की सेवा में जुटी अपनी साथी को अंतिम विदाई देते समय जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

 

अंजना कुमारी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। हर कोई अपनी गांव की बेटी को अंतिम विदाई देने पहुंचा था। जिस महिला ने वर्षों तक वर्दी पहनकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में योगदान दिया, उसकी अंतिम विदाई के समय पूरा क्षेत्र गमगीन नजर आया।

ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत

स्थानीय निवासी राजीव कालिया के अनुसार, अंजना कुमारी जम्मू में अपनी ड्यूटी के दौरान अचानक अस्वस्थ हो गई थीं। इसके बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई। पहले जम्मू में उनका उपचार किया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उन्हें चंडीगढ़ ले जाया गया। वहां भी चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सोमवार को उनका निधन हो गया। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव जोह पहुंचा। उनके अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीण और क्षेत्र के लोग एकत्र हुए तथा शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।

 

2006 में ड्यूटी के दौरान पति को खोया

अंजना कुमारी के निधन की खबर के बीच उनके परिवार की पुरानी पीड़ा भी फिर सामने आ गई है। उनके पति राकेश कुमार भी BSF में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। वर्ष 2006 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ड्यूटी के दौरान बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था।

 

पति के गुजर जाने के बाद अंजना कुमारी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और अपने दोनों बेटों की परवरिश की। एक ओर वह देश की सेवा में अपना कर्तव्य निभाती रहीं, वहीं दूसरी ओर पति के जाने के बाद परिवार को भी संभालती रहीं।

 

 

अब अंजना कुमारी के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पति को पहले ही खो चुके परिवार के लिए यह दूसरा बड़ा सदमा है। मां के चले जाने से उनके दोनों बेटे शुभम और अभिषेक माता-पिता, दोनों के साये से वंचित हो गए हैं। इस दुखद घटना ने पूरे गांव को भावुक कर दिया है।

दो बेटों के सिर से उठा मां का साया

अंजना कुमारी अपने पीछे दो बेटे शुभम और अभिषेक छोड़ गई हैं। पिता की मृत्यु के बाद मां ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थीं। अब मां के निधन से दोनों बेटों के जीवन में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। ग्रामीणों ने अंजना कुमारी को याद करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। गांव की उस बेटी को खोने का दुख हर चेहरे पर दिखाई दे रहा था, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सेवा और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बिताया।

 

विधायक राकेश कालिया और राजेश ठाकुर ने जताया शोक

गगरेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश कालिया ने अंजना कुमारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए इस कठिन समय में उन्हें ढांढस बंधाया। वहीं, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष राजेश ठाकुर भी जोह गांव पहुंचे और अंजना कुमारी की अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। क्षेत्र के लोगों ने भी दिवंगत हेड कांस्टेबल को नम आंखों से विदाई दी।

 

देश सेवा को समर्पित रहा अंजना कुमारी का जीवन

अंजना कुमारी का जीवन कर्तव्य और संघर्ष की कहानी रहा। BSF में रहते हुए उन्होंने देश की सेवा की और पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाईं। उनके निधन से परिवार ने अपना सहारा खो दिया, जबकि जोह गांव ने अपनी एक ऐसी बेटी को विदा किया, जिसने वर्दी पहनकर देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन किया। मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम थी। BSF के जवानों की सलामी और ग्रामीणों की श्रद्धांजलि के बीच अंजना कुमारी पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनके जाने से परिवार और क्षेत्र में जो दुख छाया है, उसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।