अस्पतालों में मरीजों के लिए भारी भरकम बिल चिंता का सबब बना रहता है. इलाज कराने से पहले ही लोग बिल को लेकर परेशान रहते हैं. मरीज के इलाज के बाद अस्पताल भारी भरकम बिल थमा देता है, जिसे देखकर होश उड़ जाते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे लोगों को खर्च का अंदाजा पहले ही लग जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों और अन्य संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने को कहा है.

जानकारी के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल और क्लीनिक अपनी सेवाओं और सुविधाओं के लिए लगने वाले चार्ज को साफ़साफ़ दिखाएं. इस कदम का मकसद हेल्थकेयर बिलिंग में पारदर्शिता लाना और मरीजों को इलाज के खर्च के बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध कराना है.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे एक पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने अधिकारियों से कहा कि वो जांच करें कि क्या हेल्थ केयर संस्थान मौजूदा नियमों का पालन कर रहे हैं और उन्हें ठीक से लागू करने के लिए कदम उठा रहे हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। श्रीवास्तव ने पत्र में कहा ‘मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि आप संबंधित अधिकारियों को सलाह दें कि वो रेट दिखाने से जुड़े नियमों के पालन की समीक्षा करें और उन्हें ठीक से लागू करने के लिए उचित कदम उठाएं’.

इलाज के संभावित खर्च को समझने में मदद

मंत्रालय ने कहा कि चार्ज को साफ़साफ़ दिखाने से मरीजों और उनके साथ आए लोगों को इलाज के संभावित खर्च को समझने, सही फैसले लेने और अपने हेल्थकेयर खर्च की योजना बनाने में मदद मिलेगी. इससे बिल को लेकर होने वाली उलझन और विवाद भी कम हो सकते हैं, साथ ही हेल्थकेयर सिस्टम में भरोसा भी बढ़ेगा.

यह निर्देश अस्पताल के ऊंचे बिलों जिनमें महंगे बेड चार्ज और दवाओं और मेडिकल सामान पर भारी मार्कअप शामिल हैं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, खासकर प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर में.

सभी सर्विस और सुविधाओं के रेट्स दिखाना जरूरी

केंद्र सरकार ने उन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से, जहां ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट’ लागू किया गया है, कहा है कि वो इलाज के खर्चों को दिखाने के नियमों को सख्ती से लागू करें. ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स रूल्स’ की धारा 9 के तहत हेल्थ केयर सेंटर्स के लिए ज़रूरी है कि वो हर तरह की सर्विस और उपलब्ध सुविधाओं के रेट्स दिखाएं.

स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में भी जानकारी

यह जानकारी मरीजों की सुविधा के लिए ऐसी जगह पर लगाई जानी चाहिए जहां आसानी से दिखाई दे, और इसे स्थानीय भाषा के साथसाथ अंग्रेज़ी में भी लिखा जाना चाहिए. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह एक्ट लागू नहीं हुआ है , वहां हेल्थ मिनिस्ट्री ने अधिकारियों से कहा है कि वो अपने मौजूदा रेगुलेटरी सिस्टम का इस्तेमाल करके यह पक्का करें कि अस्पताल अपने खर्चों की जानकारी दें.

मंत्रालय ने बताया कि इनमें से कई जगहों पर पहले से ही ऐसे नियम हैं जिनके तहत हेल्थकेयर सेंटर्स को रेट्स दिखाने होते हैं. इसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों को सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने में मदद करना है.

विदेशी मरीजों को भी देनी होगी जानकारी

मंत्रालय ने अस्पतालों से यह भी कहा है कि वो मेडिकल या आयुष वीज़ा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए अपने पैकेज रेट्स दिखाएं. पत्र के अनुसार, इन दरों को सार्वजनिक करने से अंतरराष्ट्रीय मरीजों को भारत में इलाज कराने से पहले खर्चों की तुलना करने और सही फ़ैसला लेने में मदद मिलेगी. इससे कीमत और बिलिंग से जुड़ी शिकायतें भी कम हो सकती हैं. मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से मेडिकल और आयुष देखभाल के लिए एक भरोसेमंद जगह के तौर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी.