प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच दिवसीय विदेश दौरों के क्रम में आठ से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे. यहां कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. फिर न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे. भारत के लिए आस्ट्रेलिया एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार देश है. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में तीसरी बार आस्ट्रेलिया पहुंचे हैं. इससे पूर्व वे नवंबर 2014, मई 2023 में आस्ट्रेलिया के दौरे पर गए थे. ऑस्ट्रेलिया वो देश है जो अपने प्राकृतिक खजाने के दम पर अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जाना जाता है. आइए, पीएम की इस तीसरी यात्रा के बहाने जानते हैं कि आस्ट्रेलिया के खजाने में प्रकृति ने क्याक्या दे रखा है, जिसके जरिए वह मालामाल होता जा रहा है?

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों वाले देशों में गिना जाता है. विशाल भूमि, कम आबादी और खनिज संपदा ने इसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है. यहां की धरती में ऐसे खजाने छिपे हैं जिनकी मांग पूरी दुनिया में है. यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है. लौह अयस्क, कोयला, सोना, प्राकृतिक गैस, लिथियम और यूरेनियम जैसे संसाधनों ने इस देश को वैश्विक बाजार में खास पहचान दिलाई है. इन खनिजों के निर्यात से आस्ट्रेलिया को हर साल अरबों डॉलर की कमाई होती है.
लौह अयस्क सबसे बड़ा खजाना
ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक खजाना लौह अयस्क यानी आयरन है. यह मुख्य रूप से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में पाया जाता है. दुनिया के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादकों में ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर है.
ऑस्ट्रेलिया के पास लौह अयस्क का बड़ा भंडार है. फोटो: pexels
लौह अयस्क से इस्पात बनता है, इसलिए इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. ऑस्ट्रेलिया की निर्यात आय का बड़ा हिस्सा इसी से आता है.
- अनुमानित भंडार: लगभग 50 से 55 अरब टन
- वैश्विक हिस्सेदारी: करीब 30 प्रतिशत
- प्रमुख खरीदार: चीन, जापान और दक्षिण कोरिया
कोयले की मुख्य खदानें क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स में हैं. फोटो: pexels
कोयला भी बड़ी कमाई का साधन
ऑस्ट्रेलिया कोयला के मामले में भी दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है. यहां दो तरह का कोयला मिलता है. थर्मल कोयला, जिससे बिजली बनती है और कोकिंग कोयला, जिसका उपयोग इस्पात उद्योग में होता है. कोयले की मुख्य खदानें क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स में हैं. कोयले के निर्यात से हर वर्ष अरबों डॉलर की आय होती है.
- अनुमानित भंडार: लगभग 150 अरब टन
- वैश्विक रैंक: शीर्ष देशों में शामिल
- प्रमुख बाजार: जापान, भारत, चीन और दक्षिण कोरिया
सोने की बढ़ती कीमतों का फायदा ऑस्ट्रेलिया को मिलता है. फोटो: pexels
सोना देता है अर्थव्यवस्था को चमक
ऑस्ट्रेलिया सोने के उत्पादन में भी दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का कालगूर्ली क्षेत्र इसके लिए सबसे प्रसिद्ध है. सोने की बढ़ती कीमतों से ऑस्ट्रेलिया को लगातार फायदा मिलता आ रहा है.
- अनुमानित भंडार: लगभग 12 हजार टन
- वैश्विक हिस्सेदारी: करीब 20 प्रतिशत के आसपास
- प्रमुख उपयोग: आभूषण, निवेश और इलेक्ट्रॉनिक्स
लिथियम का इस्तेमाल बैटरियों में होता है. फोटो: pexels
लिथियम बना नई अर्थव्यवस्था का सितारा
दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रही है. ऐसे में लिथियम की मांग लगातार बढ़ रही है. ऑस्ट्रेलिया इस समय दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम उत्पादक है. ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग ने लिथियम को ऑस्ट्रेलिया का भविष्य का सबसे बड़ा खजाना बना दिया है.
- अनुमानित संसाधन: लगभग 70 लाख टन लिथियम
- वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी: लगभग 45 से 50 प्रतिशत
- प्रमुख उपयोग: इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल और बैटरी
प्राकृतिक गैस का भी बड़ा भंडार
ऑस्ट्रेलिया तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी का प्रमुख निर्यातक है. देश के उत्तरपश्चिमी तट और समुद्री क्षेत्रों में बड़े गैस भंडार हैं. एलएनजी निर्यात से देश को हर साल भारी विदेशी मुद्रा मिलती है.
- अनुमानित गैस भंडार: लगभग 2.4 ट्रिलियन घन मीटर
- प्रमुख ग्राहक: जापान, चीन और दक्षिण कोरिया
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है.
यूरेनियम का विशाल भंडार इसे बनाता है समृद्ध
परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम जरूरी होता है. ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है. हालांकि, घरेलू स्तर पर परमाणु बिजली उत्पादन सीमित है, लेकिन यूरेनियम का निर्यात कई देशों को किया जाता है.
- अनुमानित भंडार: लगभग 17 लाख टन
- वैश्विक हिस्सेदारी: करीब 28 प्रतिशत
- प्रमुख खदानें: ओलंपिक डैम और रेंजर क्षेत्र
बॉक्साइट भी यहां कम नहीं
एल्युमीनियम बनाने के लिए बॉक्साइट की जरूरत होती है. ऑस्ट्रेलिया इस खनिज के मामले में भी बेहद समृद्ध है. बॉक्साइट और एल्यूमिनियम का निर्यात भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है.
- अनुमानित भंडार: लगभग 3.5 अरब टन
- वैश्विक हिस्सेदारी: करीब 17 प्रतिश
- प्रमुख क्षेत्र: क्वींसलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया
तांबा और निकिल की बढ़ती अहमियत
तांबा और निकिल आधुनिक उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं. इनका उपयोग बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है. ऑस्ट्रेलिया के पास इन दोनों खनिजों के भी अच्छे भंडार हैं. आने वाले वर्षों में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है.
- तांबा: लगभग 10 करोड़ टन निकाली जा चुकी है. सौ मिलियन टन जमीन के भीतर होने का अनुमान है.
- निकिल: लगभग 2 करोड़ टन निकाली जा चुकी है और बहुत बड़ी मात्रा में जमीन के अंदर उपलब्ध है.
हीरे और दुर्लभ खनिज भी कर रहे मालामाल
ऑस्ट्रेलिया कभी दुनिया के सबसे बड़े हीरा उत्पादकों में शामिल था. आज भी यहां औद्योगिक और कीमती हीरों का उत्पादन होता है. इसके अलावा दुर्लभ मृदा तत्व यानी रेयर अर्थ मिनरल्स भी मिलते हैं. इनका उपयोग रक्षा, कंप्यूटर, मोबाइल और आधुनिक तकनीक में होता है.
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है. फोटो: pexels
खनन से कितना फायदा होता है?
ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. कुल निर्यात आय का बड़ा हिस्सा खनिज और ऊर्जा संसाधनों से आता है. खनन उद्योग से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. सरकार को कर और रॉयल्टी के रूप में बड़ी आय प्राप्त होती है. विदेशी निवेश भी बड़ी मात्रा में आता है. इसी वजह से खनन उद्योग को ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक रीढ़ माना जाता है.
दुनिया की नजर ऑस्ट्रेलिया पर क्यों?
आज दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है. इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के लिए लिथियम, निकल, तांबा और रेयर अर्थ मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इन संसाधनों की प्रचुरता के कारण ऑस्ट्रेलिया आने वाले दशकों में भी वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना रह सकता है.
Landed in Melbourne, Australia. This visit will add vigour to the IndiaAustralia Comprehensive Strategic Partnership. I look forward to the talks with Prime Minister Albanese. I will also have the opportunity to interact with the Indian diaspora which is an important pillar of pic.twitter.com/Qu8BeAAeGm
— Narendra Modi July 8, 2026
ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी में खनन का कितना योगदान?
ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी लगभग दो ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास है. इसमें खनन की हिस्सेदारी तीन तरीके से समझी जा सकती है.
- जीडीपी में प्रत्यक्ष योगदान: यह लगभग 910 फीसदी है. हाल के वर्षों में यह बढ़ रही है. ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार खनन क्षेत्र का प्रत्यक्ष योगदान लगातार मजबूत बना हुआ है.
- निर्यात में योगदान: ऑस्ट्रेलिया के कुल वस्तु एवं ऊर्जा निर्यात का 5565 फीसदी हिस्सा खनिज और ऊर्जा संसाधनों से आता है. लौह अयस्क, कोयला, एलएनजी, सोना और लिथियम इसमें सबसे बड़े योगदानकर्ता हैं.
- जीडीपी में अप्रत्यक्ष प्रभाव: परिवहन, इंजीनियरिंग, मशीनरी, बंदरगाह, वित्तीय सेवाएं आदि भी जोड़ दिए जाएं, तो अर्थव्यवस्था पर खनन का प्रभाव 15 फीसदी या उससे अधिक माना जाता है.



