Raigarh Temple Compensation: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में श्रीरामजानकी, भगवान महादेव और जगन्नाथ महाप्रभु के 10 अलगअलग मंदिरों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया. ये जमीनें अलगअलग सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गईं. इन जमीनों का मुआवजा भी तय किया गया. मुआवजे की रकम सराकारी खाते में जमा कर दी गई, लेकिन ये रकम मंदिरों की नहीं मिली.

इसका कारण है जमीन का रिकॉर्ड, जिसमें भगवान को मालिक के रूप में दर्ज किया गया है. उनका कोई वैधानिक प्रतिनिधि तय नहीं किया जा सका है, जिसको ये रकम दी सके, इसलिए रायगढ़ में 10 मंदिरों का 1 करोड़ 37 लाख 94 हजार 31 312 रुपये मुआवजा अटका है. ये भुगतान 9 साल रुका हुआ है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। राजस्व विभाग के प्रवाधान देखा जाए तो इस पर 12 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज के ही अलग से 1 करोड़ 48 लाख 97857 रुपये जुड़ गए हैं.
9 साल में रकम 2 करोड़ 86 लाख 92 हजार रुपये
इन 9 सालों में मूल मुआवजे के साथ रकम 2 करोड़ 86 लाख 92 हजार रुपये हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने मुआवजे की रकम के भुगतान में पेच फंसा रखा है. दरअसल, 6 सितंबर 2021 के सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में पुजारी को मंदिर का प्रबंधक माना था, जमीन का मालिक नहीं. ऐसे में मुआवजा सीधे पुजारी को नहीं दिया जा सकता.
बची जमीन मंदिर आय का माध्यम बनी
ट्रस्ट या वैधानिक प्रबंधन संस्था होने पर उसके दस्तावेजों के आधार पर मुआवजे की रकम का भुगतान मिल सकता है, लेकिन जहां ये बात साफ नहीं है, वहां देवता की ओर से रकम लेने का अधिकार किसे है ये देखना होगा. इसी पेच की वजह से मुआवजा अब तक सराकारी खाते में पड़ा है. फिलहाल अधिग्रहण के बाद बची मंदिर की जमीन कई गांवों में मंदिर की आय का जरिया बनी हुई है.
ग्रामीण इस जमीन को खेती के लिए किसानों को देते हैं. बदले में जो पैसे मिलते हैं, उससे मंदिर की रंगाईपुताई और मरम्मत का काम करवाया जाता है.



