इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सर्वे में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम की बादशाहपुर तहसील से सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पिछले दो साल में करीब 25,000 रजिस्ट्रेशन में एक ही PAN नंबर का इस्तेमाल हुआ. इनमें करीब 55,000 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. ऐसे में सवाल है कि भारत में एक व्यक्ति अपने नाम पर कितनी प्रॉपर्टी खरीद सकता है और क्या इसको लेकर कोई कानून है?

डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 12,000 प्रॉपर्टी से जुड़े 15,000 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी विभाग को नहीं मिली थी. वहीं, करीब 25,000 अन्य प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड में लेनदेन की रिपोर्ट न देने या गलत PAN दर्ज करने जैसी गड़बड़ियां सामने आईं.

भारत में जमीन की सीलिंग का कानून क्या है?

भारत में अचल संपत्ति में घर फ्लैट और कमर्शियल प्रापर्टी खरीदने के लिए को कोई राष्ट्रीय सीमा नहीं है. मगर कृषि भूमि रखने की अधिकतम सीमा तय करने के लिए लैंड सीलिंग कानून बनाए गए हैं. इनके तहत कोई व्यक्ति या परिवार एक तय सीमा से ज्यादा खेती की जमीन नहीं रख सकता. यह सीमा राज्य, जमीन की उपजाऊ क्षमता और सिंचाई की सुविधा के आधार पर अलगअलग होती है.

इन कानूनों का उद्देश्य कुछ लोगों के पास बहुत ज्यादा जमीन जमा होने से रोकना और अतिरिक्त जमीन भूमिहीन किसानों तक पहुंचाना था. जमीन राज्य सूची का विषय है, इसलिए हर राज्य में इसके नियम अलग हैं. हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि कृषि भूमि पर लागू सीलिंग कानून का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के नाम पर घर, फ्लैट या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने की भी कोई एक तय राष्ट्रीय सीमा है.

जमीन की अधिकतम सीमा कैसे तय होती है?

जमीन की सीलिंग तय करते समय मुख्य रूप से दो बातें देखी जाती हैं.

  • परिवार के सदस्य: कानून के तहत परिवार में किन लोगों को शामिल किया जाता है, इससे जमीन रखने की अधिकतम सीमा तय होती है.
  • जमीन की किस्म: सिंचित, असिंचित और ज्यादा उपजाऊ जमीन के लिए अलगअलग सीमाएं हो सकती हैं.

परिवार के सदस्यों के आधार पर सीमा

कई राज्यों में जमीन की सीमा तय करते समय मालिक, उसके पति या पत्नी और नाबालिग बच्चों को परिवार की इकाई में शामिल किया जाता है. हालांकि, परिवार की कानूनी परिभाषा हर राज्य में अलग हो सकती है. कुछ राज्यों में पांच सदस्यों से बड़े परिवार को अतिरिक्त जमीन रखने की छूट मिलती है. उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में तय शर्तों के तहत पांच से ज्यादा सदस्यों वाले परिवार को हर अतिरिक्त सदस्य के लिए अतिरिक्त सिंचित जमीन रखने की अनुमति मिल सकती है. लेकिन कुल सीमा पर भी पाबंदी होती है.

अलगअलग राज्यों में जमीन रखने की सीमा

कृषि भूमि रखने की अधिकतम सीमा हर राज्य में अलगअलग है. महाराष्ट्र में जमीन की किस्म के आधार पर यह सीमा 18 से 54 एकड़ तक बताई गई है. उत्तर प्रदेश में पांच सदस्यों तक के परिवार के लिए 7.30 हेक्टेयर सिंचित जमीन की सीमा है, जबकि अन्य श्रेणियों में यह अलग हो सकती है. कर्नाटक में जमीन की श्रेणी के आधार पर 10 यूनिट की सीमा लागू होती है. वहीं, पश्चिम बंगाल में परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार दो से सात स्टैंडर्ड हेक्टेयर तक जमीन रखने की सीमा बताई गई है. इन नियमों में जमीन की गुणवत्ता, परिवार के आकार और कानून में दिए गए अपवादों के आधार पर अंतर हो सकता है.

किन जमीनों को सीलिंग कानून से छूट मिल सकती है?

कुछ खास उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन को राज्य के कानूनों के तहत सीलिंग से छूट मिल सकती है. इनमें शामिल हैं.

  1. चाय, कॉफी और रबर के बागान: बड़े बागानों और उनसे जुड़ी गतिविधियों के लिए कुछ राज्यों में छूट का प्रावधान है.
  2. धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाएं: मान्यता प्राप्त ट्रस्ट या संस्थाओं को निर्धारित शर्तों के तहत छूट मिल सकती है.
  3. उद्योग और गैरकृषि इस्तेमाल: सरकारी अनुमति से औद्योगिक या अन्य गैरकृषि कामों के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन पर अलग नियम लागू हो सकते हैं.
  4. कृषि अनुसंधान: कुछ राज्यों में अनुसंधान केंद्रों और विशेष कृषि गतिविधियों के लिए जमीन को छूट मिल सकती है.

जमीन का बंटवारा और विरासत के नियम क्या हैं?

जमीन की सीलिंग से बचने के लिए परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन बांटने या ट्रांसफर करने की कोशिश रोकने के लिए राज्यों में विशेष प्रावधान हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कुछ राज्यों में तय तारीख के बाद हुए बंटवारे या ट्रांसफर की जांच की जाती है, ताकि पता लगाया जा सके कि वह वास्तविक था या सिर्फ सीलिंग कानून से बचने के लिए किया गया था. उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में 2 अक्टूबर 1975 के बाद हुए कुछ बंटवारों, पश्चिम बंगाल में 7 अगस्त 1969 के बाद के बंटवारों और गुजरात में 24 जनवरी 1971 से 1 अप्रैल 1976 के बीच हुए कुछ जमीन ट्रांसफर पर विशेष नियम लागू होते हैं. इन प्रावधानों का उद्देश्य कागजों पर जमीन बांटकर कानूनी सीमा से ज्यादा जमीन रखने की कोशिश रोकना है.

जमीन विरासत में मिलने पर उत्तराधिकारियों के हिस्से और सीलिंग कानून के तहत परिवार की इकाई की गणना अलगअलग कानूनी सवाल हैं. किसी व्यक्ति को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलने से यह जरूरी नहीं कि सीलिंग कानून में परिवार की परिभाषा भी अपने आप बदल जाए. इसलिए विरासत में मिली जमीन की अधिकतम सीमा तय करने के लिए संबंधित राज्य का कानून और लागू न्यायिक फैसले देखना जरूरी है.