सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि मुझे राहुल गांधी का परसों पत्र मिला था, लेकिन ज्ञापन के बजाय याचिका दायर की जाए. देश में कोई भी याचिका दायर कर सकता है. चिट्ठी के जवाब में न मिलने की वजह बताते हुए सीजेआई ने कहा कि कोर्ट में मामला पहले से विचाराधीन है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हम कानून के मुताबिक सुनवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. लेटर की बातों को गोपनीय रखते हुए सीजेआई ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं. राहुल गांधी के लेटर पर उन्होंने अपनी असमर्थता जाहिर की है.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सीजेआई के साथ बैठक करने की मांग की थी.
सीजेआई ने क्या बताई वजह?
मुख्य न्यायाधीश ने साफसाफ कहा है कि देश के संविधान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट सरकार के रोजमर्रा के प्रशासनिक या सरकारी कामकाज में सीधा दखल नहीं दे सकता. हालांकि, उन्होंने विपक्षी नेताओं को यह छूट दी है कि अगर उन्हें कोई कानूनी शिकायत है, तो वे एक आम नागरिक की तरह कोर्ट में याचिका दर्ज करा सकते हैं.
Here is a copy of CJI Shri Surya Kant’s letter to Congress President & LoP in Rajya Sabha Shri @kharge and LoP in Lok Sabha Shri @RahulGandhi. https://t.co/n76NmufJ9P
— Congress October 12, 2026
कोर्ट ने यह भी बताया कि अगर विपक्ष का कोई भी नेता कोर्ट में याचिका दायर करता है, तो उस पर मंगलवार को ही सुनवाई हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कुछ ऐसे ही केस पहले से ही मंगलवार को सुनवाई के लिए कोर्ट में लगे हुए हैं.
‘संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो तो अदालतें दखल दें’
CJI सूर्य कांत ने NHRC स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “जब संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो अदालतों को दखल देना चाहिए. मानवाधिकार आयोगों को शिकायतों की जांच करनी चाहिए, व्यवस्थागत कमियों की पहचान करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन मुद्दों पर अन्यथा ध्यान नहीं दिया जाता, उन पर संस्थागत स्तर पर ध्यान दिया जाए.”



