Indian Rupee Jump: भारतीय करेंसी मार्केट से राहत देने वाली खबर सामने आई है. लगातार गिर रहे रुपये को संभालने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने वीकेंड पर कुछ बेहद सख्त कदम उठाए हैं. इन फैसलों का सकारात्मक असर सोमवार सुबह बाजार खुलते ही देखने को मिला. डॉलर की बढ़ती डिमांड और सट्टेबाजी वाले ट्रेड पर लगाम कसने के लिए उठाए गए इन कदमों ने रुपये में नई जान फूंक दी है.

रुपये को मिला आरबीआई का बूस्टर

सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.76 पर खुला. बीते शुक्रवार को बाजार बंद होने पर ये 96.73 के स्तर पर था. इस हिसाब से रुपये में लगभग 1 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई है. रुपये में ये सुधार ऐसे समय में आया है जब करेंसी बाजार काफी दबाव से गुजर रहा था.

कैलेंडर वर्ष 2026 में रुपया 7 प्रतिशत से ज़्यादा टूट चुका था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं वित्त वर्ष 2027 में भी अब तक इसमें करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी थी. मई महीने में तो ये 96.96 प्रति डॉलर के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था. रुपये पर इस भारी दबाव के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत होता डॉलर और विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा बाहर निकालना मुख्य कारण रहे हैं.

तेल कंपनियों के लिए नई व्यवस्था

डॉलर की डिमांड को कंट्रोल करने के लिए RBI ने एक खास रणनीति अपनाई है. रिज़र्व बैंक ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसी बड़ी सरकारी तेल कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है. अब ये कंपनियां अपनी रोजमर्रा की डॉलर की जरूरतें रेगुलर स्पॉट मार्केट से पूरी करने के बजाय सीधे तय किए गए बैंकों के जरिए पूरी कर सकेंगी.

इसके अलावा आरबीआई ने सट्टेबाजी रोकने के लिए भी कड़ा एक्शन लिया है. बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र वाले खास विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव ट्रांज़ैक्शन की लिमिट को 10 करोड़ डॉलर से घटाकर सीधे 50 लाख डॉलर कर दिया गया है. साथ ही कुछ चुनिंदा विदेशी मुद्रा कॉन्ट्रैक्ट्स पर 20 प्रतिशत कैश रिजर्व रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है.

एक्सपर्ट्स का क्या है नजरिया

बाजार के जानकारों का मानना है कि इन फैसलों के कई मायने हैं. एक बड़ी ब्रोकरेज फर्म के ट्रेडर के मुताबिक तेल कंपनियों के लिए बनी स्पेशल विंडो से रेगुलर मार्केट में डॉलर की डिमांड काफी कम हो जाएगी. इससे बाजार में होने वाले भारी उतारचढ़ाव को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी. हालांकि इसका एक पहलू ये भी है कि इस सुविधा से आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा.

प्राइवेट बैंक के एक ट्रेज़री हेड का कहना है कि इन पाबंदियों से कुछ वक्त के लिए रुपये को अच्छा सपोर्ट मिलेगा. लेकिन नए नियमों के लागू होने की प्रक्रिया में जो अनिश्चितता है, उसके कारण बैंक डॉलर के रेट्स तय करने में ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं. इससे मार्केट में लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है और विदेशी मुद्रा बाज़ार में खरीदबिक्री की कीमतों के बीच का अंतर बढ़ सकता है.

आगे कैसा रहेगा रुपये का हाल

इन उपायों से फॉरवर्ड हेज की लागत में इजाफा हो सकता है, जिससे इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की मांग में कुछ कमी आ सकती है. हालांकि ये नियम तेल इंपोर्ट, ट्रेड पेमेंट या विदेशी पूंजी की निकासी से पैदा होने वाली डॉलर की असल मांग को कम नहीं करते हैं. ये सिर्फ डॉलर खरीदने के तरीके को बदलते हैं या उसे थोड़ा महंगा बना देते हैं.

करेंसी एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में USD/INR पेयर के 95.30 से 96.20 की रेंज में कारोबार करने की उम्मीद है. रुपये के लिए 94.50 पर सपोर्ट लेवल है जबकि 96.70 पर रेजिस्टेंस बना हुआ है. भले ही RBI के इन नए उपायों ने रुपये पर से फौरी तौर पर दबाव कम कर दिया है, लेकिन असली चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं.