कुल्लू। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ सुरक्षित माहौल भी मिले। इसके लिए वे अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन जब स्कूल की इमारत ही बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए, तो अभिभावकों की चिंता बढ़ना लाजिमी है। ऐसा ही मामला जिला कुल्लू से सामने आया है, जहां सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों के कारण बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में कुछ परिवारों को अपने बच्चों को गांव से बाहर भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

तीन सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत खराब

बता दें कि पेखड़ी पंचायत के राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-1, शालिंगा और राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-2 के साथ नाहीं स्कूल की हालत को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन स्कूलों के भवन काफी पुराने हैं और धीरे-धीरे उनकी स्थिति और खराब होती जा रही है।

कुछ भवनों को असुरक्षित भी घोषित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक उन्हें गिराने का काम शुरू नहीं हुआ है। इससे अभिभावकों को डर है कि कहीं बच्चों के साथ कोई हादसा न हो जाए।

पेखड़ी-2 स्कूल में सिर्फ आठ बच्चे, शौचालय और रसोई भी खराब

पेखड़ी गांव के राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-2 की हालत भी ठीक नहीं है। इस स्कूल में फिलहाल केवल आठ बच्चे पढ़ रहे हैं। स्थानीय समाजसेवी यज्ञ चंद जुफरा ने बताया कि स्कूल का भवन अच्छी स्थिति में नहीं है। यहां शौचालय और रसोईघर भी पूरी तरह खराब हो चुके हैं। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करवाने के साथ-साथ जरूरी सुविधाएं देना भी बड़ी जरूरत है।

अच्छी पढ़ाई के लिए बच्चों को गांव से बाहर भेज रहे माता-पिता

स्थानीय निवासी पदम देव का कहना है कि स्कूलों की खराब हालत और सुविधाओं की कमी के कारण माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं। अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कई परिवारों को बच्चों को गांव से बाहर भेजना पड़ रहा है। इससे परिवारों पर खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है।

 

वहीं, स्थानीय निवासी महेश्वर सिंह ने कहा कि अगर गांव के स्कूलों में सुरक्षित भवन और जरूरी सुविधाएं मिलें, तो माता-पिता को बच्चों को पढ़ाई के लिए घर से दूर नहीं भेजना पड़ेगा। उनका कहना है कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा और सुरक्षित स्कूल मिलने चाहिए।

टूटी सड़कों और कच्चे रास्तों से भी लोग परेशान

पेखड़ी पंचायत में केवल स्कूलों की हालत ही समस्या नहीं है, बल्कि सड़कें और रास्ते भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। ग्राम पंचायत नौहांडा के पूर्व प्रधान स्वर्ण सिंह ठाकुर ने बताया कि इलाके में कई सड़कें टूटी हुई हैं। कच्चे रास्तों के कारण लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है।

पहाड़ी इलाके में सड़कें बच्चों, ग्रामीणों और दूसरे लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों और प्रशासन को गंभीरता से काम करना चाहिए।

पांच साल पहले बनी पंचायत, फिर भी विकास की रफ्तार धीमी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेखड़ी पंचायत करीब पांच साल पहले ग्राम पंचायत नौहांडा से अलग होकर बनी थी। लेकिन इतने समय बाद भी इलाके में विकास कार्यों की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन का निर्माण कार्य भी अभी शुरुआती चरण में है। स्कूलों, सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं में सुधार नहीं होने से लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं।

स्कूल भवनों की रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई

खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रमेश भारद्वाज ने बताया कि पिछले साल बंजार क्षेत्र में आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 10 प्राथमिक स्कूलों के भवनों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। इस मामले को लेकर वीरवार को बंजार में SDM के साथ बैठक भी हुई, जिसमें इन समस्याओं पर चर्चा की गई।

उन्होंने बताया कि खराब स्कूल भवनों को गिराने के लिए जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब आगे की कार्रवाई लोक निर्माण विभाग को करनी है।

ग्रामीण बोले- रिपोर्ट भेजने से नहीं, काम करने से मिलेगी राहत

ग्राम पंचायत पेखड़ी के उपप्रधान नील चंद ने कहा कि स्कूलों के भवनों की खराब हालत शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। गांव के बच्चों को भी सुरक्षित स्कूल भवन, पर्याप्त कमरे और पढ़ाई के लिए अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि सिर्फ रिपोर्ट भेज देने से समस्या हल नहीं होगी। जरूरी है कि संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई करें और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खराब भवनों की समस्या का समाधान करें।

ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार

पेखड़ी पंचायत के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित विभाग शालिंगा, पेखड़ी और नाहीं के स्कूलों की हालत सुधारने के लिए जल्द कदम उठाएंगे। साथ ही टूटी सड़कों और कच्चे रास्तों को ठीक करने की मांग भी उठाई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। गांव में ही अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, तभी माता-पिता को अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजने की मजबूरी से राहत मिलेगी।