इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए भारी मात्रा में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। यह तैनाती रावलकोट समेत उन जगहों पर ज्यादा की गई है, जहां प्रदर्शन जारी हैं। पीओके में 27 जुलाई को आम चुनाव भी होने हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर उससे पहले विरोध प्रदर्शनों को दबाना चाहता है। ऐसी आशंका है कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बरता से पेश आ सकते हैं, जैसा उन्होंने बलूचिस्तान और गिलगित बाल्टिस्तान में किया है।

पीओके छावनी में बदला

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना और दूसरे प्रशासनिक तंत्र मतदान से पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शांतिपूर्ण माहौल बनान चाहते हैं। ऐसे में पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को सीधा निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि आगामी चुनावी प्रक्रिया में विरोध प्रदर्शन से कोई बाधा उत्पन्न न हो। पीओके में जम्मूकश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में हफ्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों और सरकार की विफलताओं के खिलाफ है।

पाकिस्तानी सेना ने अल्टीमेटम दिया

पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम दिया है कि वे अब बातचीत नहीं करेंगे और प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं देंगे। सूत्रों ने बताया कि सैन्य अधिकारियों ने रावलकोट में जमा प्रदर्शनकारियों को अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है, जिसमें उनसे शांतिपूर्वक अपना धरना समाप्त करने या जबरन हटाए जाने की कार्रवाई का सामना करने को कहा गया है। माना जा रहा है कि सुरक्षा अधिकारियों ने अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को चेतावनी भी दी है कि यदि वे स्वेच्छा से आंदोलन वापस लेने से इनकार करते हैं, तो सुरक्षा बल विरोध स्थल को खाली कराने के लिए अभियान शुरू कर सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को तैयार पाकिस्तान

ऐसी आशंका है कि पाकिस्तानी सेना अगले 24 से 48 घंटों के भीतर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने या न करने पर अंतिम निर्णय ले सकती है। फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस मामले की निगरानी खुद कर रहे हैं। उन्होंने अपने मातहतों को स्पष्ट तौर पर निर्देश दिए हैं कि इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए जो कुछ किया जा सकता है, उन सभी विकल्पों को आजमाया जाए। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी प्रदर्शनकारियों से स्वेच्छा से अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने के लिए अंतिम मौका दे चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शन को खत्म करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया, तो सुरक्षा एजेंसियां बड़े पैमाने पर अभियान चला सकती है।