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इंदौर |07 अक्टूबर 2026| मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से साइबर अपराध का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। यहाँ खजराना थाना पुलिस और मुंबई महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच ने मिलकर पंकज गुप्ता नाम के एक शख्स को पकड़ा है। आरोप है कि यह शख्स इंदौर में बैठकर देशभर के ठगों के लिए फर्जी APK फाइलें (मोबाइल ऐप) तैयार करता था। शुरुआती जाँच में पता चला है कि इसने करीब 2,905 नकली ऐप बनाकर साइबर अपराधियों को बेचे, जिनसे देशभर के लगभग 9,673 लोगों को चूना लगाया गया।

इंजीनियरिंग की अधूरी पढ़ाई और गेमिंग ऐप से सीखा ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया कि आरोपी पंकज मूल रूप से नागदा का रहने वाला है और उसने बीच में ही अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप बनाने का काम करता था, जहाँ से उसने APK फाइलें तैयार करने की तकनीक सीखी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बाद में उसका संपर्क साइबर ठगों से हुआ और उसने आसानी से पैसे कमाने के चक्कर में फर्जी बैंकिंग और वेरिफिकेशन ऐप बनाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि वह पिछले तीन सालों से ठगों को यह डिजिटल हथियार सप्लाई कर रहा था।

5 रुपये भेजने का भरोसा और फिर पूरा बैंक खाता खाली

पूछताछ में सामने आया कि ठग लोगों को झांसे में लेने के लिए खुद को SBI, HDFC या किसी नामी बैंक का मैनेजर बताते थे। वे पीड़ित से कहते थे कि उनका खाता या KYC बंद होने वाला है। इसके बाद पीड़ित को WhatsApp या SMS पर एक APK फाइल या लिंक भेजा जाता था। कई बार ठग शिकार को फँसाने के लिए कहते थे कि ‘QR कोड स्कैन करके सिर्फ 5 रुपये भेजकर चेक कर लीजिए।’ जैसे ही कोई शख्स 5 रुपये भेजता, ऐप उसके फोन का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथ में सौंप देता था और देखते ही देखते खाता खाली हो जाता था।

पेंशन, चालान और KYC के नाम से बनाई जाती थी नकली फाइलें

पकड़ा गया आरोपी खुद किसी को फोन करके ठगी नहीं करता था, बल्कि उसका काम सिर्फ नकली ऐप तैयार करना था। बता दें कि लोगों को आसानी से धोखा देने के लिए इन ऐप्स के नाम सरकारी सेवाओं जैसे रखे जाते थे। इनमें ‘पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन’, ‘सीनियर सिटीजन कार्ड’, ‘RTO चालान’, ‘क्रेडिट कार्ड अपडेट’ और ‘बैंक KYC’ जैसे नाम शामिल थे। लोग असली और नकली में फर्क नहीं पहचान पाते थे और ऐप इंस्टॉल करते ही ठगी का शिकार हो जाते थे।

15.75 करोड़ की ठगी का खुलासा

मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए अब तक 15.75 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का पता चल चुका है। हालांकि पुलिस को शक है कि पूरे मामले की गहराई से जाँच होने पर यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। यह मामला दिखाता है कि अब साइबर अपराध का तरीका बदल चुका है। पुलिस अब उन तमाम गिरोहों की कुंडली खंगाल रही है, जिन्होंने पंकज से ये APK फाइलें खरीदी थी।

आपके पास भी आ सकता है ऐसा मैसेज

इस पूरे खुलासे के बाद पुलिस ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है। अगर आपके फोन पर WhatsApp या SMS के जरिए किसी अनजान ऐप की फाइल (APK) आती है, तो उसे भूलकर भी इंस्टॉल न करें।

• किसी भी बैंक या सरकारी योजना के नाम पर भेजे गए अज्ञात ऐप पर भरोसा न करें।

• KYC या वेरिफिकेशन के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या Google Play Store के अधिकृत ऐप का ही इस्तेमाल करें।

• अगर कोई बैंक अधिकारी बनकर फोन करे और ऐप डाउनलोड करने को कहे, तो तुरंत फोन काटकर बैंक की नजदीकी शाखा से संपर्क करें।