
मध्य प्रदेश के बड़वानी से BJP सांसद गजेंद्र पटेल के दो बयानों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. एक बयान में उन्होंने हिंदू समाज से कम से कम 4-5 बच्चे पैदा करने और परिवार का विस्तार करने की अपील की, तो दूसरे बयान में धार्मिक आयोजनों में DJ संस्कृति को लेकर युवाओं पर गंभीर टिप्पणी कर दी. सांसद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह आबादी, परिवार, शादी की उम्र और धार्मिक आयोजनों में युवाओं के व्यवहार को लेकर अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं.
गजेंद्र पटेल ने कहा कि पहले परिवार बड़े हुआ करते थे और लोगों के पांच, सात या यहां तक कि दस भाई-बहन होते थे, लेकिन अब परिवार छोटे होते जा रहे हैं. उन्होंने समुदाय से अपनी संख्या और वंश बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा समय में कम से कम 4-5 बच्चों की जरूरत है. सांसद ने इसके पीछे काम और कारोबार के विस्तार का भी तर्क दिया और इसे देश की एकता से जोड़ते हुए अपनी बात रखी.
BJP सांसद गजेंद्र सिंह पटेल कौन?
मध्य प्रदेश के खरगोन से BJP सांसद गजेंद्र सिंह पटेल इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान सिर्फ लोकसभा सांसद तक सीमित नहीं है. आदिवासी बहुल क्षेत्र से आने वाले पटेल ने लंबे समय तक संगठन में काम करने के बाद चुनावी राजनीति में कदम रखा और 2019 में पहली बार लोकसभा पहुंचे. इसके बाद 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार खरगोन सीट से जीत दर्ज की.
बड़वानी में हुआ जन्म, कृषि से जुड़े हैं गजेंद्र पटेल
गजेंद्र सिंह पटेल का जन्म 16 फरवरी 1975 को मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम उमराव सिंह पटेल और मां का नाम सुशीला बाई पटेल है. उन्होंने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की है. राजनीति के साथ उनका जुड़ाव कृषि क्षेत्र से भी रहा है. उनकी पत्नी का नाम बसंती पटेल है और उनके दो बेटे हैं. आदिवासी क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक संगठनात्मक नेता के तौर पर भी बनी.
RSS और ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
गजेंद्र पटेल की राजनीति सीधे चुनावी मैदान से शुरू नहीं हुई थी. उनका शुरुआती जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा से रहा. वर्ष 1990 में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के जरिए संगठनात्मक गतिविधियों में काम करना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने भाजपा के युवा संगठन, वनवासी कल्याण परिषद और भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. लंबे संगठनात्मक अनुभव ने उन्हें मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में पार्टी का चेहरा बनने में मदद की.
BJP संगठन में संभालीं कई बड़ी जिम्मेदारियां
गजेंद्र पटेल ने भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 2017 में उन्हें मध्य प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली. वर्ष 2021-22 के दौरान वह भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रहे. इस दौरान आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की पहुंच बढ़ाने से जुड़े कामों में उनकी भूमिका रही.
2019 में पहली बार पहुंचे लोकसभा
गजेंद्र पटेल के राजनीतिक करियर में बड़ा मोड़ 2019 के लोकसभा चुनाव में आया. भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, से उम्मीदवार बनाया. उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार संसद में प्रवेश किया. इससे पहले वह भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके थे.
2024 में लगातार दूसरी बार सांसद बने
2019 की जीत के बाद भाजपा ने 2024 में एक बार फिर गजेंद्र पटेल पर भरोसा जताया. उन्होंने खरगोन लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. इस जीत के साथ वह 18वीं लोकसभा के सदस्य बने. खरगोन-बड़वानी क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं के बीच उनकी राजनीतिक पकड़ को उनकी लगातार चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
संसद में किन मुद्दों को उठाते रहे हैं?
सांसद के तौर पर गजेंद्र पटेल ने अपने क्षेत्र से जुड़े कई स्थानीय और आदिवासी मुद्दों को संसद में उठाया है. इनमें रेल कनेक्टिविटी, सड़क, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे मुद्दे शामिल हैं. उन्होंने खंडवा-अलीराजपुर-खरगोन रेल परियोजना, आदिवासी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज, सिकल सेल एनीमिया, टीबी नियंत्रण, पीएम किसान योजना और जैविक खेती जैसे विषयों पर भी सवाल उठाए हैं.
बड़वानी के लिए पीएम मित्र पार्क की मांग
वर्ष 2026 में गजेंद्र पटेल ने बड़वानी में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की मांग भी उठाई. उनका तर्क रहा है कि इससे क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है. संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 13 अगस्त 2026 तक उनकी सदन में उपस्थिति करीब 97 फीसदी रही थी. इससे संसद की कार्यवाही में उनकी नियमित भागीदारी का अंदाजा लगाया जा सकता है.
‘कम से कम 4-5 बच्चे होने चाहिए’, सांसद ने क्यों कही ये बात?
बड़वानी में दिए बयान में गजेंद्र पटेल ने कहा कि पुराने समय में बड़े परिवार सामान्य बात थे. उनके मुताबिक, अब परिवार छोटे हो गए हैं, इसलिए समाज को अपने विस्तार पर ध्यान देना चाहिए. सांसद ने कहा कि काम और व्यवसाय का दायरा भी पहले के मुकाबले बढ़ा है. इसी संदर्भ में उन्होंने समुदाय से कम से कम चार से पांच बच्चे पैदा करने की अपील की. उन्होंने इसे सिर्फ परिवार बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समुदाय की संख्या और देश की एकता से भी जोड़ दिया. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर परिवार, जनसंख्या और जनसंख्या संतुलन को लेकर बहस शुरू हो गई है.
शादी 30-35 की उम्र में नहीं, 20-23 में होनी चाहिए?
गजेंद्र पटेल ने अपने बयान में शादी की उम्र को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि आजकल लोग 30 या 35 साल की उम्र में शादी कर रहे हैं, जबकि सनातन धर्म के अनुयायियों को पारंपरिक व्यवस्था की ओर लौटना चाहिए. सांसद ने 20, 22 या 23 साल की उम्र में शादी करने की बात कही. उनका कहना था कि पहले कम उम्र में विवाह की परंपरा रही है और मौजूदा समय में भी सही समय पर विवाह किया जाना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इसमें शादी की उम्र और परिवार के आकार को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है.
धार्मिक आयोजनों में DJ को लेकर भी भड़के गजेंद्र पटेल
सांसद गजेंद्र पटेल का दूसरा बयान धार्मिक आयोजनों में DJ संस्कृति को लेकर है. उन्होंने शिव डोला, गणेश विसर्जन की झांकियों और नवरात्र जैसे धार्मिक आयोजनों का जिक्र करते हुए युवाओं के व्यवहार पर सवाल उठाया. पटेल ने दावा किया कि इन धार्मिक आयोजनों में DJ की धुन पर नाचने वाले करीब 90 फीसदी युवक-युवतियां शराब के नशे में होते हैं.
सांसद के इस दावे ने एक अलग विवाद खड़ा कर दिया है. धार्मिक आयोजनों में DJ, युवाओं की भागीदारी और नशे के इस्तेमाल को लेकर उनके बयान पर अब अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हालांकि, 90 फीसदी युवाओं के नशे में होने का दावा सांसद की ओर से किया गया है और इसके समर्थन में कोई आंकड़ा या स्वतंत्र सर्वे सामने नहीं आया है.
शिव डोला से नवरात्र तक, किन आयोजनों का किया जिक्र?
गजेंद्र पटेल ने धार्मिक आयोजनों के उदाहरण देते हुए शिव डोला, गणेश विसर्जन की झांकियों और नवरात्र का जिक्र किया. उनका कहना था कि धार्मिक पर्वों का उद्देश्य केवल DJ पर नाचना या मनोरंजन करना नहीं होना चाहिए. उनके बयान में धार्मिक आयोजनों की मूल भावना और युवाओं के व्यवहार को लेकर चिंता दिखाई दी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने नशे की स्थिति में ऐसे आयोजनों में शामिल होने वाले युवाओं पर भी सवाल उठाया.
एक बयान परिवार बढ़ाने पर, दूसरा युवाओं पर… क्यों चर्चा में हैं गजेंद्र पटेल?
गजेंद्र पटेल के दोनों बयानों का केंद्र समाज और युवा पीढ़ी है, लेकिन मुद्दे अलग हैं. एक तरफ उन्होंने परिवार छोटा होने, बच्चों की संख्या बढ़ाने और कम उम्र में शादी की बात कही. दूसरी तरफ धार्मिक आयोजनों में युवाओं की कथित नशे की आदत और DJ संस्कृति पर निशाना साधा. यही वजह है कि उनके बयान के अलग-अलग हिस्से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. कुछ लोग इसे पारंपरिक सामाजिक मूल्यों की वकालत के तौर पर देख रहे हैं, जबकि दूसरी ओर परिवार नियोजन, विवाह की उम्र और युवाओं को लेकर किए गए दावों पर सवाल भी उठ रहे हैं.



