FASTag Minimum Balance: अगर आपके घर में भी चार पहिए वाहन है और आप भी हाईवे पर सफर करते हैं, तो ये खबर आपके लिए जरुरी है। कई लोगों को कंफ्यूजन रहता है कि FASTag में मिनिमम कितना बैलेंस रखें और क्या बैलेंस कम होने या न होने पर ब्लैकलिस्ट हो सकता है? आइए विस्तार से जानें..

FASTag पर कितना रखें बैलेंस?
अगर आप सफर करने जा रहें हैं तो आपके FASTag कम से कम उतना बैलेंस तो होना चाहिए कि, आप अपने सफर को आराम से तय कर सकें। या इतना तो हो की आपका फास्टैग निगेटिव न हो और आसानी से भुगतान किया जा सके।
अगर फास्टटैग में पैसे नहीं है तो आपको टोल प्लाजा पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं आपका फास्टैग ब्लॉक किया जा सकता है। ऐसे में थोड़ा बैलेंस रखना जरुरी है।
नियम कब और क्या हुआ बदलाव?
सरकार की तरफ से फास्टैग में बैलेंस तय नहीं किया गया है। NHAI ने फास्टैग में मिनिमम बैलेंस यानी थ्रेसहोल्ड अमाउंट की शर्त पहले ही हटा दी थी, अब फास्टैग के लिए कोई एक तय मिनिमम बैलेंस रखने का नियम नहीं है।
बता दें कि, NHAI ने फरवरी 2021 में फास्टैग वॉलेट में जरूरी थ्रेसहोल्ड अमाउंट की शर्त हटा दी थी। और इसके साथ NHAI की ओर से स्पष्ट किया गया कि अगर फास्टैग अकाउंट या वॉलेट का बैलेंस निगेटिव नहीं है तो गाड़ी को टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
क्यों होता है FASTag ब्लैकलिस्ट
1. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वॉलेट या खाते में न्यूनतम आवश्यक राशि से कम बैलेंस होना ब्लैकलिस्ट होने का सबसे आम कारण है।
2. फास्टैग खाते की केवाईसी प्रक्रिया का पूरा न होना या दस्तावेजों का अपडेट न होना।
3. फास्टैग पर दर्ज वाहन का नंबर और गाड़ी की नंबर प्लेट का आपस में मेल न खाना।
इन वाहनों पर नहीं लगता FASTag
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 के तहत, दोपहिया और तिपहिया वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। इसलिए बाइक या स्कूटर के लिए FASTag लगवाना या खरीदना जरूरी नहीं है।
फ्री FASTag में किसे और कब तक मिलेगी छूट?
नई वैधता के नियम के मुताबिक, जिन लोगों का नाम 70% से 100% तक विकलांगता में दर्ज होगा। उनके लिए फ्री FASTag की वैधता सीधे 5 साल होगी। वहीं जिनका नाम 40% से 70% से कम विकलांगता में दर्ज होगा। उनके लिए FASTag की वैधता 3 साल तय की गई है।
पहले टोलफ्री Fastag का हर साल नवीनीकरण कराना जरूरी था। लेकिन अब नई व्यवस्था से पात्र लाभार्थियों को FASTag की वैधता विकलांगता के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी। अब उन्हें बारबार डॉक्यूमेंट जमा कराने और रिन्यू कराने की आवश्कता नहीं पड़ेगी।



