क्या आप अपनी जिंदगी के नाना पाटेकर को पहचानते हैं? ये बात रेड फ्लैग, ग्रीन फ्लैग और टॉक्सिक वाली वोकेब्लरी के चलन से पहले की बात है. जब कोई रिश्ता कोई व्यक्ति बंधनों में जकड़ने की कोशिश करने वाला लगता तो हम भाई बहनों में दोस्तों में कोड था. ये नाना पाटेकर है. आज तक भी किसी टॉक्सिक को हम नाना पाटेकर ही संबोधित करते हैं कि फलां तुम्हारी जिंदगी का नाना पाटेकर है. निकाल फेंको इसे अपने जीवन से, वरना ये तुम्हें जीने नहीं देगा. कितना आसान कर दिया था नाना पाटेकर ने हमारे लिए एक व्याख्या को. कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं. बस कह दो ये नाना पाटेकर हैं.

जिसे भी अग्निसाक्षी की मनीषा कोईराला याद होगी वो इस बात से रिलेट कर सकते हैं, वो कैसे नाना पाटेकर की एक आवाज पर सिहर जाती थी. कांपने लगती थी. किसी से आपको किरदार की वजह से नफरत हो जाए. ये विचित्र ज़रूर है लेकिन एक कलाकार की खासियत ही यही है उसकी उपलब्धि है कि उसने इतने प्राण झोंक दिए, उसे निभाने में कि हम उसे सच ही मान बैठे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जैसे हम बचपन से प्रेम चोपड़ा, प्राण, शक्ति कपूर और रंजीत से नफरत करते हुए बड़े हुए. टीनएज में हमें नाना पाटेकर ने विलेन का मतलब समझाया और हम उनसे नफरत कर बैठे
डॉयलॉग के बादशाह
दिल में फीलिंग हो तो बिना कुछ बोले भी एक से दस तक की गिनती में रोना, उफ्फ ये क्या आइटम थमा के चले गए. वजूद फिल्म का डॉयलॉग जिसमें वो कहते हैंकोई डायलॉग नहीं चाहिए. एक से दस तक गिनती भी करोगी ना लेकिन दिल से, आंखें भर आएंगी… एक, दो, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ, नौ, दस… देखो भर गईं आंखें.”
भरे बैठे किसी भी इन्सान को ये एक दो तीन में दिल उलीच के रख देने की प्रैक्टिस देने वाले नाना पाटेकर ही थे.. उनके डॉयलॉग हमेशा भारी रहे लिखने वाले की कलम का तो कमाल है ही लेकिन नाना ने हमेशा सब कुछ अपनी एक्टिंग से ओवरशैडो कर दिया.
शायद फर्स्ट मीटिंग या पहली पहचान में ही आप किसे के लिए इंप्रेशन बना लेते हैं ना उसी तरह नाना पाटेकर ने मन में सबको ओवरपावर करने वाले आदमी की पहचान बना ही.. लेकिन क्या ये सिर्फ किसी एक के मन का इंप्रेशन था नहीं, नाना पाटेकर ने अपने हर कैरेक्टर को ऐसे जिया कि कभी लगा उनसे ईमानदार ही कोई नहीं. कभी उनसे खूंखार कोई नहीं तो कभी उनसा समर्पित कोई नहीं.
कैसे एक संदेश है नाना का निधन?
आखिरी बार मैंने उन्हें फिल्म वैक्सीन वॉर में डॉ. बलराम भार्गव के रूप में देखा तब थोड़ाथोड़ा उनके लिए दिल पसीजा कि आदमी इतना भी बुरा नहीं, कितना डेडिकेटेड साइंटिस्ट है. उनके जाने की खबर बहुतों के लिए नुकसान बहुत से लोगों के लिए आघात है… लेकिन जिस देश में लोग काशी में देह त्यागने की तमन्ना लिए घूमते हों वहां गोवा में नाना पाटेकर का निधन स्वंय में संदेश है कि काम करते हुए ही चले जाना जीवन को उत्सव बनाना भी है और मोक्ष भी.
अलविदा और थैंक्यू किरदार ऐसे निभाने के लिए कि वो परिभाषा ही बन जाएं…



