दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार, जो इस वर्ष वैश्विक स्तर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख स्टॉक इंडेक्स में से एक रहा है, को आज एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। एआई चिप शेयरों में आई भारी बिकवाली के कारण दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स ‘कोस्पी’ में 6.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान यह इंडेक्स 505 अंक टूटकर 7,546.10 के स्तर पर आ गया। बाजार में मची इस अफरातफरी के कारण प्रोग्राम ट्रेडिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

यह गिरावट मुख्य रूप से दिग्गज चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में हुई बिकवाली के कारण आई है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में 7.47% की भारी गिरावट देखी गई, जबकि एसके हाइनिक्स का शेयर 6.70% लुढ़क गया। कोस्पी इंडेक्स में इन दो कंपनियों की हिस्सेदारी आधे से अधिक है, जिसके चलते इनका गिरना पूरे बाजार के लिए घातक साबित हुआ। बाजार में फैले डर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल चिप कंपनियां ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।
एलजी एनर्जी सॉल्यूशन के शेयरों में 6.77% की गिरावट रही, जबकि हनवा ओशन का शेयर 22.91% तक नीचे गिर गया। इसके अलावा हुंडई मोटर में 6.57%, किया कॉर्प में 5.66%, पॉस्को होल्डिंग्स में 3.27% और सैमसंग बायोलॉजिक्स में 0.57% की गिरावट दर्ज की गई। इस व्यापक बिकवाली ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है कि क्या एआई सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आई अब तक की तेजी उनके फंडामेंटल से अधिक हो गई है। वैश्विक स्तर पर एडवांस्ड एआई हार्डवेयर की बढ़ती मांग ने इन कंपनियों को मजबूती दी थी, लेकिन हालिया स्थिति ने इस तेजी की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बाजार में इस दबाव का एक प्रमुख कारण एप्पल इंक द्वारा दो चीनी कंपनियों से चिप्स की आपूर्ति के लिए की जा रही बातचीत को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एप्पल इन कंपनियों के साथ आगे बढ़ता है, तो सैमसंग और एसके हाइनिक्स को भविष्य में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, इस हालिया गिरावट के बावजूद दक्षिण कोरियाई बाजार का इस वर्ष का प्रदर्शन अब भी मजबूत है। वर्ष 2026 में अब तक इसमें 76% की तेजी रही है, जो इसे दुनिया के प्रमुख सूचकांकों में शीर्ष पर रखती है। गौरतलब है कि चिप शेयरों में आई इस तेजी के दम पर ही दक्षिण कोरिया ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन अब भारतीय बाजार फिर से इस स्थिति में आगे निकल गया है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सुधार अल्पकालिक है या चिप सेक्टर की बड़ी मंदी की शुरुआत है।



