
पिछले कुछ सालों में पेट्रोल-डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक कारों को अपनाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के लिए बेहतर होने के कारण EV लोगों को पसंद आ रही हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले सिर्फ इसकी कीमत और चार्जिंग खर्च देखना काफी नहीं है. इंश्योरेंस भी EV की कुल लागत का एक अहम हिस्सा है.
सभी कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है और EV और पेट्रोल-डीजल कारों के बीच इसके प्रीमियम में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता. लेकिन ओन डैमेज कवर EV के लिए महंगा हो सकता है. इसकी वजह EV की ज्यादा कीमत, महंगे पार्ट्स और रिपेयर का ज्यादा खर्च है.
EV का प्रीमियम कितना ज्यादा हो सकता है?
कई इंश्योरेंस कंपनियां EV का प्रीमियम पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले करीब 15-25% ज्यादा बताती हैं. हालांकि, ऑनलाइन इंश्योरेंस पोर्टल्स पर कुछ मामलों में यह अंतर 25-60% तक दिखाई देता है. इसे उदाहरण से समझें तो CarWale के मुताबिक, Tata Nexon खरीदने पर करीब 40 हजार रुपये और Tata Nexon EV खरीदने पर करीब 50 हजार रुपये इंश्योरेंस के लिए देने पड़ते हैं.
इंश्योरेंस महंगा होने के कारण?
1. EV की कीमत ज्यादा होना
EV का इंश्योरेंस महंगा होने की सबसे बड़ी वजह इसकी खरीद कीमत है. इलेक्ट्रिक कारें आमतौर पर समान पेट्रोल-डीजल मॉडल से करीब 12-30% महंगी हो सकती हैं. कार की कीमत ज्यादा होने पर उसका IDV यानी Insured Declared Value भी ज्यादा होता है. यही IDV इंश्योरेंस प्रीमियम तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए महंगी कार का इंश्योरेंस भी ज्यादा हो सकता है.
2. बैटरी सबसे महंगा पार्ट
EV में बैटरी सबसे महत्वपूर्ण और महंगे हिस्सों में से एक है. Digit General Insurance के मुताबिक, कई प्रमुख EV मॉडल में बैटरी बदलने का खर्च कार की कुल कीमत का 50-70% तक हो सकता है. Bajaj Allianz General Insurance के अनुसार, मॉडल और बैटरी की क्षमता के आधार पर सिर्फ बैटरी बदलने का खर्च ₹7 लाख तक पहुंच सकता है. ऐसे में बैटरी को नुकसान होने का जोखिम इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ा देता है.
3. EV की रिपेयर लागत भी ज्यादा
EV की इलेक्ट्रिक मोटर और हाई-वोल्टेज बैटरी को रिपेयर करना सामान्य कारों की तुलना में महंगा हो सकता है. कई कंपनियां इन पार्ट्स के छोटे-छोटे हिस्से यानी चाइल्ड पार्ट्स अलग से उपलब्ध नहीं कराती हैं. ऐसे में पूरा बड़ा पार्ट बदलना पड़ सकता है. हालांकि EV की मोटर को सामान्य तौर पर पेट्रोल-डीजल इंजन की तुलना में कम मेंटेनेंस की जरूरत होती है, लेकिन खराबी आने पर रिपेयर का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है. इसके अलावा, EV की सर्विस के लिए जरूरी उपकरण और स्पेशल सर्विस सेंटर अभी हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी के कारण रिपेयर में ज्यादा समय और ज्यादा लेबर कॉस्ट भी लग सकती है.



