एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है. वह 31 अक्टूबर, 2026 की दोपहर को आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे और 31 दिसंबर, 2028 तक इस पद पर बने रहेंगे. वह एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान सेना का नेतृत्व किया था.

एयर मार्शल के पास मिराज2000, मिग के अलगअलग वर्जन, HPT32, An32, एवरो, किरण, जगुआर, IL78, हॉक और तेजस जैसे कई तरह के विमान उड़ाने का लंबा अनुभव है. वो एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं. लगभग चार दशक के अपने सर्विस करियर के दौरान वो कई ऑपरेशन और एक्सरसाइज में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जैसे ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोपइंडिया और ऑपरेशन सिंदूर.
3500 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव
वायु सेना में स्वदेशी LCA तेजस और दूसरे स्वदेशी विमान प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए मशहूर एयर मार्शल दीक्षित से सरकार की ‘आत्मनिर्भरता’ पहल को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. उन्हें 1986 में IAF की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था. वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं. उनके पास 3500 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है.
1986 में एयरफोर्स की फाइटर स्ट्रीम में हुए थे शामिल
9 दिसंबर 1966 को जन्मे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे. वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ का पद संभालने से पहले एयर मार्शल दीक्षित ने हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंगइनचीफ के तौर पर काम किया है.
एयरफोर्स की ओर से मिल चुके हैं ये 4 सम्मान
अपने शानदार करियर के दौरान एयर मार्शल ने कई अहम फील्ड और स्टाफ पदों पर काम किया है. उन्होंने वेस्टर्न सेक्टर में एक फ्रंटलाइन फाइटर एयर बेस और सदर्न सेक्टर में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अलगअलग भूमिकाओं में उनके योगदान से भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल क्षमता बेहतर हुई है. उनकी बेहतरीन और खास सर्विस के लिए उन्हें 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है.



