दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए. रात 10:23 बजे रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.9 दर्ज की गई. ये झटके दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में भी महसूस किए गए हैं. अचानक धरती हिलने से सहमे लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए. कुछ देर तक अफरातफरी का माहौल रहा है. हालांकि बाद में सब सामान्य हो गया.

बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र खाडून लागा ग्वाली से 22 किलोमीटर दूर था. इसके अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी रिक्टर स्केल पर 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. उत्तराखंड के सभी जिलों के अलावा, उत्तर भारत के कई बड़े इलाकों में भी ये झटके महसूस हुए, जिनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और भी शामिल हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई. गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ जैसे इलाकों की हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकल आए.
30 सेकंड तक महसूस किए गए झटके
बताया जा रहा है कि झटके लगभग 30 सेकंड तक महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत पैदा कर दी. ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग ज्यादा डरे दिखे. और तुरंत अपनी बिल्डिंग से बाहर निकल आए. हालांकि भूकंप ज्यादा देर तक नहीं रहा, लेकिन इसने लोगों में डर पैदा कर दिया.
दिल्लीNCR भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन
नोएडा और दिल्लीNCR इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन में आता है. दिल्ली को सिस्मिक जोन4 में रखा गया है, जिसे भूकंप के लिए ज्यादा जोखिम वाला इलाका माना जाता है.
EQ of M: 4.9, On: 06/10/2026 22:23:13 IST, Lat: 30.103 N, Long: 79.561 E, Depth: 13 Km, Location: Chamoli, Uttarakhand.
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नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, 6 अक्टूबर को देश के अलगअलग हिस्सों और आसपास के इलाकों में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए. इन हालिया घटनाओं की NCS की वेबसाइट पर दी गई है. फिलहाल हर जगह हालात सामान्य हैं. किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.
भूकंप क्यों आते हैं?
पृथ्वी की सतह के नीचे सात प्लेटें हैं जो लगातार हिलती रहती हैं. जिन जगहों पर ये प्लेटें अक्सर आपस में टकराती हैं, उन्हें ‘फॉल्ट लाइन’ कहा जाता है. बारबार टकराने से प्लेटों के किनारे मुड़ जाते हैं, जब दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो प्लेटें टूटने लगती हैं. नीचे से निकलने वाली ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता ढूंढती है, और इसी हलचल के कारण भूकंप आता है.



