Delhi Riots Hate Speech HC: दिल्ली ) दंगों के दौरान नेताओं की कथित हेट स्पीच High Court Decisions) को लेकर ने 2020 के रिपोर्ट दर्ज करने FIR और SIT से जांच कराने की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने इस मामले में FIR और SIT जांच की मांग को बड़ा झटका लगा है।

15 याचिकाएं खारिज
आपको बता दें पूरा मामला जामिया हिंसा और फरवरी 2020 के उत्तरपूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों से जुड़ा है। जिसमें दाखिल 15 याचिकाओं पर आज दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राजनीतिक नेताओं के कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर FIR दर्ज करने, पुलिस जांच और SIT जांच की मांग की याचिका ठुकरा दी है।
क्या था दिल्ली दंगा 2020?
आपको बता दें 6 साल पहले 23 फरवरी 2020 की फरवरी में उत्तरपूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इसी बीच सीएए के समर्थक और विरोधियों के बीच भीषण सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। जाफराबाद और मौजपुर जैसे इलाकों में भड़की थी। तब ये तनाव आगजनी, पथराव और हिंसक झड़प में बदल गया और कई दिनों तक चला था।
इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा समेत कुल 53 लोगों की जान चली गई थी। साथ ही 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसमें बड़ी संख्या में घरों, दुकानों, वाहनों और धार्मिक स्थलों को आग के हवाले कर दिया गया था। जिसमें भारी संपत्ति का नुकसान हुआ था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।
इनके खिलाफ FIR की मांग
कोर्ट में जिनके खिलाफ याचिकाएं लगाई गईं उनमें कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा समेत कई राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। इसमें कुछ बड़े राजनेताओं की बात करें तो अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया, अकबरुद्दीन ओवैसी और अन्य नेताओं के नाम शमिल हैं।
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