Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने एक परिवार को कुछ घंटों के लिए गहरे सदमे में डाल दिया. न्यू मॉडर्न रेलवे कॉलोनी निवासी मंशालाल शुक्रवार को पीलीभीत में रहने वाले अपने दोस्त से मिलने की बात कहकर घर से निकले थे. इसके बाद शहीद गेट रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई. सूचना मिलने पर मंशालाल के बेटे और परिजन मौके पर पहुंचे. हुलिया देखकर उन्होंने शव की पहचान मंशालाल के रूप में कर ली.

पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. परिवार में मातम छा गया. रिश्तेदार और पड़ोसी घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देने लगे, लेकिन अगले ही दिन शनिवार को ऐसा हुआ, जिसे देखकर परिवार के लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. जिस व्यक्ति को मृत समझकर अंतिम संस्कार किया गया था, वही मंशालाल अचानक अपने घर के दरवाजे पर खड़े थे.

दरवाजे पर मंशालाल को देखकर परिवार के उड़े होश

मंशालाल को सामने देखकर परिवार में पहले हैरानी और फिर खुशी का माहौल हो गया. कुछ देर पहले तक जिस घर में मौत का मातम था, वहां अचानक खुशियां लौट आईं. परिवार को समझ में नहीं आया कि जब मंशालाल जिंदा हैं तो शुक्रवार को जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था. इसके बाद मंशालाल को बैरियरएक पुलिस चौकी ले जाया गया. वहां पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी गई. पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की तो एक बड़ी गलत पहचान का खुलासा हुआ.

पुलिस के अनुसार शुक्रवार सुबह डिफेंस कॉलोनी निवासी आलोक यादव के पिता चंद्रिका सिंह भी टहलने के लिए घर से निकले थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद वह वापस नहीं लौटे. चंद्रिका सिंह रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट थे. परिजन उन्हें तलाश कर रहे थे. चंद्रिका सिंह के बेटे आलोक यादव भी पुलिस चौकी पहुंचे. उन्होंने पुलिस को अपने पिता की फोटो, हुलिया और कपड़ों के बारे में जानकारी दी. इसके बाद पुलिस के सामने पूरे मामले की तस्वीर साफ होने लगी.

पुलिस ने चंद्रिका सिंह के परिवार को क्या बताया?

परिजनों ने भी हुलिया और कपड़ों के आधार पर शव को मंशालाल का मान लिया. इसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने पर अंतिम संस्कार कर दिया गया. पुलिस ने चंद्रिका सिंह के परिवार को बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार गलती से मंशालाल के नाम पर कर दिया गया है. इस जानकारी के बाद परिवार के सामने भी स्थिति साफ हो गई. खास बात यह है कि मंशालाल और चंद्रिका सिंह के परिवार आसपास की कॉलोनियों में ही रहते हैं. दोनों परिवारों के बीच दूरी भी ज्यादा नहीं है.

एक तरफ मंशालाल अपने दोस्त के घर रुके हुए थे, दूसरी तरफ चंद्रिका सिंह घर से टहलने निकले थे. इसी बीच हुए ट्रेन हादसे और शव की गलत पहचान ने दोनों परिवारों को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. वहीं इज्जतनगर थाना के इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र गौतम के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया कि शुक्रवार को ट्रेन हादसे में जिस बुजुर्ग की मौत हुई थी, वह मंशालाल नहीं बल्कि चंद्रिका सिंह थे.

मंशालाल और चंद्रिका सिंह दोनों की उम्र करीब 72 वर्ष थी. दोनों का हुलिया भी काफी मिलताजुलता था. इसी वजह से मंशालाल के बेटे केशव ने शव की पहचान अपने पिता के रूप में कर ली.